नई दिल्ली : गाजा में जारी इजराइल हमास युद्ध (War) को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. Emirati Leaks के हाथ एक सरकारी दस्तावेज हाथ लगा है. एक्सेस किए गए इस लीक सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इजराइल को सीधे सैन्य, खुफिया और लॉजिस्टिक सहायता देने की योजना बनाई थी. दावा है कि यह मदद रेड सी में मौजूद UAE के सैन्य ठिकानों के जरिए दी जा रही है. यह दस्तावेज UAE और इज़राइल के बीच अब तक के सबसे प्रत्यक्ष सैन्य सहयोग को उजागर करता है.
लीक दस्तावेज में कहा गया है कि UAE ने यमन, इरिट्रिया और सोमालिया में स्थित अपने ठिकानों का इस्तेमाल कर इज़राइल को मदद पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली थी. ये समर्थन गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई के दौरान दिया जाना था. दस्तावेज में साफ लिखा है कि इसका मकसद फिलिस्तीन में आतंकियों के खिलाफ इज़राइल के युद्ध को मजबूत करना है.
यह पत्र अक्टूबर 2023 का बताया जा रहा है, जिसे हमदान बिन जायद अल-नाहयान, UAE रेड क्रिसेंट अथॉरिटी के चेयरमैन ने लिखा था. यह चिट्ठी UAE आर्म्ड फोर्सेज के जॉइंट ऑपरेशंस कमांड को भेजी गई थी. इसमें सैन्य तैयारी, खुफिया सहयोग और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ी तमाम जानकारियां दर्ज हैं.

लीक रिपोर्ट में लिखा है कि UAE और इज़राइल के बीच पुराने रिश्ते हैं, जो 2020 के बाद और मजबूत हुए. दस्तावेज के मुताबिक, ये रिश्ते UAE को अच्छे और बुरे वक्त में इजराइल की मदद करने के लिए बाध्य करते हैं. दस्तावेज में दावा किया गया है कि UAE ने इज़राइल को एक अरब डॉलर के खुफिया उपकरण और टेक्नोलॉजी मुहैया कराई है. इसके अलावा, आतंकवाद विरोधी अभियानों, सैन्य तकनीक और इंटेलिजेंस शेयरिंग में की बात भी कही गई है.
UAE और इजराइल ने 2020 में अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत रिश्ते सामान्य किए थे, जिसे अमेरिका ने मध्यस्थता कर अंजाम दिया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच राजदूतों की नियुक्ति हुई और हाल ही में UAE ने इजराइल में स्थायी दूतावास के लिए जमीन भी खरीदी जो किसी अरब देश द्वारा पहली बार किया गया कदम है.
दस्तावेज में सिर्फ इजराइल समर्थन की बात नहीं है, बल्कि कतर और कुवैत पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसमें दावा किया गया है कि कतर ने हमास को समर्थन देकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया. वहीं, कुवैत पर आरोप है कि उसने फिलिस्तीनी लड़ाकू संगठनों को भारी वित्तीय मदद दी, जो UAE-कुवैत के बीच हुए समझौतों का उल्लंघन है. दस्तावेज में यह तक कहा गया है कि कुवैत को विरोधी देशों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए.