यूपी में अब गांव-गांव के पकवानों को मिलेगी पहचान, ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना का होगा विस्तार; जीआई टैग से बनेंगे ब्रांड
दादी-नानी के हाथों के पकवान बनेंगे बड़े ब्रांड
गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘एक जिला-एक व्यंजन’ समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओसी के तहत पहले से चिह्नित व्यंजनों के अलावा भी प्रदेश में कई ऐसे पारंपरिक पकवान हैं, जिन्हें पहचान और बाजार की जरूरत है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दादी-नानी से सीखे गए पकवान और पीढ़ियों से घरों में सहेजी जा रही पाक कला को ब्रांड के रूप में विकसित किया जा सकता है। बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और घरों में बनने वाली मूंग दाल की नमकीन जैसे उत्पादों में बड़े कारोबार की क्षमता है। गुणवत्ता, शुद्धता और बेहतर पैकेजिंग पर ध्यान दिया जाए तो इन्हें राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक बाजार में भी पहचान मिल सकती है।
ओडीओपी की सफलता के बाद बढ़ेगा ओडीओसी का दायरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के एक-एक उत्पाद को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश से करीब दो लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हो रहा है। अब तक 80 उत्पादों को जीआई टैग भी मिल चुका है।
उन्होंने जापान के ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 300 उत्पादों के माध्यम से दो लाख करोड़ रुपये की कमाई की गई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को भी इसी तरह विशिष्ट पहचान देकर बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के पारंपरिक खान-पान का सर्वे कराने के बाद ओडीओसी योजना शुरू की गई थी। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका शुभारंभ किया था। अब योजना का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले परिवारों और कारीगरों को भी अवसर मिल सकेगा।
कारीगरों और परिवारों को 20 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री ने पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और घरों में खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए युवा उद्यमी योजना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि योजना के तहत शुरुआत में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटीमुक्त ऋण के साथ सब्सिडी का प्रावधान है।
इस सहायता राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक किया गया है, जबकि बड़े कारोबार के लिए 20 लाख रुपये तक की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से अपने पारंपरिक हुनर को व्यवसाय में बदलने की अपील भी की।
500 रुपये से शुरू किया अचार का काम, आज 500 महिलाओं को रोजगार
योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर की ‘अचार वाली दीदी’ का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने महज 500 रुपये उधार लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया था। आज उनके इस काम से 500 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह स्थानीय व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को प्रोत्साहन देकर बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे पारंपरिक हुनर को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।
मूंग दाल की नमकीन बेचने वाली बच्ची के साथ सीएम ने ली सेल्फी
कार्यक्रम में व्यंजन प्रदर्शनी का अवलोकन करते समय मुरादाबाद से आए अमित कुमार सक्सेना की बेटी वाची ने मुख्यमंत्री को आवाज देकर मूंग दाल की नमकीन लेने के लिए कहा। मुख्यमंत्री उसके स्टॉल पर पहुंचे तो बच्ची ने बताया कि उसकी मां घर पर यह नमकीन तैयार करती हैं।
योगी आदित्यनाथ ने बच्ची के साथ सेल्फी ली और अपने संबोधन में इस प्रसंग का जिक्र किया। उन्होंने वाची को उसके परिवार के साथ मंच पर बुलाकर उसके उत्साह की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों में तैयार होने वाले ऐसे उत्पादों को अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने संबंधित विभाग और दैनिक जागरण से ऐसे कारीगरों और परिवारों को प्रोत्साहित करने की अपील भी की।
आठ कुशल कारीगरों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आठ कुशल कारीगरों को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में जगदीश यादव, संदीप कुमार, राकेश कुमार, ब्रजेश कश्यप, बलराम गुप्ता, नीलू कुमार, शिवानी मवई और श्रवण लाल शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन अलग-अलग जिलों के कारीगरों, हलवाई परिवारों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को पहचान दिलाने का माध्यम बन रहे हैं।
कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, दैनिक जागरण के निदेशक संदीप गुप्ता, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी सहित विभिन्न जिलों से आए कारीगर और कारोबारी मौजूद रहे।
नौ लाख करोड़ का कारोबार करने वाली कंपनी का उदाहरण देकर पूछा सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया की बड़ी खाद्य कंपनियों में शामिल एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का कारोबार करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह रकम उत्तर प्रदेश सरकार के वार्षिक बजट के बराबर है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक कंपनी खाद्य उत्पादों के जरिए इतना बड़ा कारोबार कर सकती है तो बलिया का बाटी-चोखा और जौनपुर की इमरती बड़े ब्रांड क्यों नहीं बन सकते? मुख्यमंत्री के मुताबिक, सही गुणवत्ता, शुद्धता, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध होने पर प्रदेश के पारंपरिक पकवानों को भी बड़ी पहचान मिल सकती है।