जल-थल-गगन, UP लिख रहा विकास की नई गाथा

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश का नाम आते ही कभी विशाल जनसंख्या, पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों की चर्चा होती थी। लेकिन, आज वही उत्तर प्रदेश विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, तेज कनेक्टिविटी और मजबूत लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के दम पर भारत के विकास मानचित्र पर एक नई, सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पौने नौ वर्षों में केवल योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया, जहां सड़क, रेल, जल और नभ, चारों साधन मिलकर आर्थिक प्रगति की धुरी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या में बड़ा राज्य नहीं, बल्कि विकास, निवेश और कनेक्टिविटी में भी अग्रणी राज्य बन चुका है। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के सहारे उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है, जहां सड़कें गति देती हैं, नदियां दिशा दिखाती हैं और हवाई मार्ग प्रदेश को विश्व से जोड़ते हैं।

भारत में जलमार्ग परिवहन को नई दिशा देते हुए उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर विकसित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) देश की पहली अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना के रूप में सामने आया है। प्रयागराज से हल्दिया तक फैला यह जलमार्ग लगभग 1,620 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से करीब 1,100 किलोमीटर का खंड उत्तर प्रदेश में पहले से ही क्रियाशील है। यह केवल एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर भारत के लिए जीवन-रेखा समान लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन चुका है। NW-1 के माध्यम से वाराणसी और प्रयागराज जैसे पारंपरिक व्यापारिक व निर्यात केंद्र अब सीधे कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह से जुड़ गए हैं। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आई है, बल्कि समयबद्ध और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिला है। वाराणसी के अस्सी घाट व राजघाट जैसे टर्मिनल तथा प्रयागराज व गाजीपुर के फ्लोटिंग टर्मिनल यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश अब जलमार्ग आधारित अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रणनीति का केंद्रबिंदु अब मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी बन चुका है। दादरी में विकसित किया जा रहा मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और बोड़ाकी में प्रस्तावित मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। इन हब्स के माध्यम से सड़क, रेल और जलमार्ग के बीच निर्बाध परिवहन संभव होगा, जिससे उद्योगों को कच्चे माल की आसान उपलब्धता और तैयार उत्पादों के त्वरित निर्यात की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग का प्रमुख केंद्र बनाने में निर्णायक साबित हो रही है।

उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे केवल सड़कें नहीं, बल्कि विकास की धमनियां बन चुके हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को राजधानी और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ दिया है। देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे भी जल्द शुरू होने वाला है। आज देश के 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी में हैं। इन एक्सप्रेसवेज के कारण जहां यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आई है, वहीं इनके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स पार्क, मेडिकल हब और एजुकेशनल कॉरिडोर भी विकसित हो रहे हैं। वर्तमान में सात प्रमुख एक्सप्रेसवे संचालित हैं और पांच नए एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं, जबकि 10 एक्सप्रेसवे पर सर्वे जारी है। इनके पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 22 एक्सप्रेसवे वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जो निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार को विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। आज प्रदेश में 16 घरेलू हवाई अड्डे संचालित हैं, जो छोटे और मध्यम शहरों को भी राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर जैसे शहरों में संचालित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। गौतम बुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो अपने निर्माण के अंतिम चरण में है, भविष्य में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत का प्रमुख एविएशन हब बनने जा रहा है। लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित यह एयरपोर्ट प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

लगभग 16 हजार किलोमीटर के विशाल रेल नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क वाला राज्य बन चुका है, जो यात्रियों और माल परिवहन, दोनों के लिए मजबूत रीढ़ का काम कर रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। देश में सर्वाधिक शहरों में मेट्रो संचालन का गौरव आज उत्तर प्रदेश के पास है। लखनऊ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, कानपुर व आगरा, पांच शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर पर देश की पहली रैपिड रेल का संचालन शुरू हो चुका है और शीघ्र ही मेरठ में मेट्रो सेवा भी प्रारंभ होने जा रही है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और बरेली जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं का ग्राउंड-वर्क जारी है, जिन्हें चरणबद्ध रूप से शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त वाराणसी में देश की पहली शहरी रोप-वे सेवा का कार्य भी प्रगति पर है।

2017 से पहले यूपी निवेश के नक्शे से बाहर था। लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग की कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। आज नोएडा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स से यूपी निवेश और रोजगार का हब बनता जा रहा है। इसके अतिरिक्त लखनऊ में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क, बरेली में मेगा फूड पार्क, उन्नाव में ट्रांस गंगा सिटी, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क, वाराणसी में पहला फ्रेट विलेज समेत कई परियोजनाएं यूपी के विकास को नया आयाम दे रही हैं।

 

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