बिहार में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में आंधी-बारिश और वज्रपात का अलर्ट; पटना में छाए रहेंगे बादल

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पटना। उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, गांगेय पश्चिम बंगाल के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वी भारत में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण बिहार के मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बुधवार तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला रहेगा और कई इलाकों में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के अधिकतर जिलों में बादल छाए रहने के साथ मेघ गर्जन और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

सीतामढ़ी समेत कई जिलों में यलो अलर्ट

अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के पूर्वी हिस्सों में स्थित सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, शेखपुरा, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, किशनगंज और अररिया जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने, मेघ गर्जन और वज्रपात की आशंका को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

इन इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की या छिटपुट बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं है।

पटना में आंशिक बादल, तापमान में आई गिरावट

सोमवार को राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में दिनभर आंशिक बादल छाए रहे, हालांकि मौसम शुष्क बना रहा। मौसम में बदलाव के चलते पटना सहित राज्य के 16 जिलों में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

पटना का अधिकतम तापमान बीते 24 घंटों में 1.4 डिग्री सेल्सियस गिरकर 31.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राज्य में सबसे अधिक तापमान 34.3 डिग्री सेल्सियस कैमूर में रिकॉर्ड किया गया।

राजधानी का न्यूनतम तापमान इस सीजन में 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि भागलपुर के सबौर में न्यूनतम तापमान 19.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

फसलों के लिए मौसम अनुकूल, लेकिन किसानों को सतर्क रहने की सलाह

मौसम में आए बदलाव को कृषि के लिहाज से काफी हद तक अनुकूल माना जा रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर की कृषि विज्ञानी रूबी के अनुसार राज्य में आम और लीची के पेड़ों पर इस समय अच्छी मात्रा में मंजर लगे हुए हैं। ऐसे में वातावरण में बढ़ी नमी इन फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और मधुआ कीट का प्रकोप भी कम रहेगा।

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेज आंधी या ओलावृष्टि होती है तो आम और लीची के मंजर झड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि इस समय गेहूं की फसल दाने भरने की अवस्था में है। ऐसे में हल्की बारिश फसल के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन तेज आंधी और बारिश से फसल गिरने का खतरा भी बना रहता है। वहीं तापमान में अधिक बढ़ोतरी होने पर इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ फसलों पर भी पड़ सकता है।

 

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