एक तरफ जहां भारत की स्पेस एजेंसी इसरो लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही है, वहीं अमेरिका के महत्वाकांक्षी मून मिशन को बड़ा झटका लगा है। NASA का बहुप्रतीक्षित Artemis II अब तय समय पर लॉन्च नहीं हो पाएगा। यह मिशन 6 मार्च को उड़ान भरने वाला था, लेकिन तकनीकी खामी सामने आने के बाद इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई है।
हीलियम फ्लो में गड़बड़ी बनी वजह
नासा प्रमुख जारेड इसाकमैन ने साफ किया कि तकनीकी समस्याओं के कारण मार्च में लॉन्च संभव नहीं है। सबसे बड़ी समस्या दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System (SLS) में हीलियम फ्लो से जुड़ी खराबी है। हीलियम के बहाव में आई इस गड़बड़ी ने मिशन को रोकने पर मजबूर कर दिया।
मरम्मत के लिए वापस जाएगा रॉकेट
अब SLS रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में वापस ले जाया जाएगा, जहां विस्तृत जांच और मरम्मत की जाएगी। जारेड इसाकमैन ने कहा कि टीम दिन-रात काम कर रही है और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि 1960 के दशक में भी ऐतिहासिक मिशनों के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
चीन के साथ स्पेस रेस में दबाव
इस देरी का रणनीतिक महत्व भी है। China 2030 तक इंसान को चंद्रमा पर भेजने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में अमेरिका पर दबाव बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भी मिशन को फरवरी-मार्च तक लॉन्च करने पर जोर दिया था, ताकि चीन से आगे रहा जा सके। नासा का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्रमा को एक स्थायी बेस के रूप में विकसित करना है, जिससे भविष्य में मंगल मिशन की राह आसान हो सके।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन की खासियत?
आर्टेमिस-2 के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की कक्षा में लगभग 10 दिन बिताएंगे और फिर पृथ्वी पर लौटेंगे। इस क्रूड फ्लाईबाई मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। यह मिशन इंसानों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके बाद Artemis III के तहत मानव को फिर से चंद्रमा पर उतारने की योजना है।
पहले भी टल चुका है कार्यक्रम
यह पहली बार नहीं है जब आर्टेमिस प्रोग्राम में देरी हुई हो। इससे पहले Artemis I भी कई बार टला था। हाल ही में वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन लीक की समस्या भी सामने आई थी।
स्पष्ट है कि तकनीकी जटिलताओं और वैश्विक स्पेस रेस के बीच नासा का यह मिशन चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि आखिरकार आर्टेमिस-2 कब उड़ान भरता है और क्या अमेरिका 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के करीब पहुंचाने के अपने लक्ष्य में सफल हो पाता है।