Women’s Day Special: जानिए क्या है महिलाओं के लिए मैटरनिटी एक्ट, कितने दिन की मिलती है छुट्टी और सुविधाएं

0 165

International Women’s Day 2025: आज दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। महिलाओं ने पुरूषों के साथ कदम से कदम मिलाकर अब हर क्षेत्र में नया मुकाम बनाया है। यहां पर महिलाओं को लेकर हो रहे उत्पीड़न, अत्याचार के खिलाफ सरकार ने कुछ सकारात्मक कदम भी उठाए है। यहां पर नौकरीपेशा महिलाओं के लिए सरकार ने एक कानून बनाया था जिसमें मां बनने के दौरान महिलाओं को मैटरनिटी लीव दी जा रही थी। इस कानून के प्रति भी महिलाएं सजग नहीं है तो चलिए आज हम जानते हैं क्या है महिलाओं के लिए बना मैटरनिटी लीव एक्ट।

कब पास हुआ था 1961 का यह एक्ट
महिला दिवस के मौके पर आज हम बात कर रहे हैं महिलाओं को मिलने वाले मैटरनिटी लीव एक्ट के बारे में। यह एक्ट साल 1961 में कामकाजी महिलाओं के लिए पास किया गया था जिसका लक्ष्य मैटरनिटी लाभ देना था। यहां पर मैटरनिटी लीव का फायदा प्रत्येक बड़े प्रतिष्ठान, या फिर छोटी बड़ी कंपनी हर किसी पर लागू होता है। इस एक्ट में प्रेग्नेंट हुई कामकाजी महिलाओं को कई महीनों का अवकाश दिया जाता है। ताकि वह उस दौरान अपना और अपने बच्चे का ख़ास ख्याल रख सके। यदि कोई महिला 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती है, तो उसे भी यह लीव दी जाती है।

जानिए कितने दिन मिलती है छुट्टी और वेतन
यहां मैटरनिटी एक्ट के दायरे में जब महिलाएं आती है तो उन्हें भारत में 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान है, जो बच्चे के जन्म से पहले और बाद में लिया जा सकता है। यहां पर इस एक्ट के तरह डिलीवरी से आठ हफ्ते पहले और उसके बाद इस अवकाश का इस्तेमाल कर सकती हैं। किसी भी कंपनी में यह प्रावधान सिर्फ 2 बच्चों तक ही सिमित है। जो महिलाएं तीसरे बच्चे को जन्म दे रही हैं वो डिलीवरी से 6 हफ्ते पहले और 6 हफ्ते बाद छुट्टी ले सकती हैं। किसी भी महिला को उसके प्रसव के छह सप्ताह के दौरान काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं को मैटरनिटी लीव के दौरान पूरा वेतन मिलता है जो कंपनी नियमित रूप से करती है। यहां पर मातृत्व अवकाश शुरु होने से लेकर खत्‍म होने तक यह सैलरी दी जाती है।

मिसकैरेज में मैटरनिटी लीव
कई मामलों में अगर गर्भपात किया जाता है तो तब गर्भपात करवाने पर गर्भपात की तारीख से छह सप्ताह के लिए महिला मैटरनिटी लीव ले सकती है। यदि कोई भी कंपनी इस एक्‍ट के अंदर महिला को उसकी सैलरी देने से मना करती है, तो उसे कानून की ओर से सजा दी जा सकती है। इसमें 5,000 के जुर्माना या एक साल की सजा या दोनों का प्रावधान है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.