नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में यात्रा के दौरान अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन पर अब सख्ती बढ़ने वाली है। केंद्र सरकार ने मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत कई आपराधिक प्रावधानों को हटाकर उनकी जगह अधिक मौद्रिक दंड लगाने की योजना है। इस बदलाव का उद्देश्य मेट्रो में व्यवस्था बनाए रखना और यात्रियों को नियमों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना है।
लोकसभा में पेश हुआ संशोधन विधेयक
शुक्रवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। प्रस्ताव के मुताबिक, मेट्रो परिसर या कोच में गंदगी फैलाने पर अब 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जो पहले के मुकाबले काफी अधिक है।
छोटी लापरवाही भी अब पड़ेगी महंगी
नए नियमों के तहत नशे में हंगामा करना, थूकना, ट्रेन के फर्श पर बैठना, झगड़ा करना, आपत्तिजनक सामान ले जाना या प्रदर्शन करना—इन सभी मामलों में जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने का प्रस्ताव है। यानी अब मामूली दिखने वाली लापरवाही भी यात्रियों पर भारी पड़ सकती है।
महिला कोच में घुसने पर सख्त प्रावधान
मेट्रो कोच के भीतर लिखने, पोस्टर चिपकाने या गंदगी फैलाने पर पहले एक हजार रुपये जुर्माना या छह महीने की जेल या दोनों का प्रावधान था। अब इसे बदलकर अधिकतम 10 हजार रुपये तक का जुर्माना करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, महिला कोच में प्रवेश करने पर पहले 250 रुपये जुर्माना या तीन महीने की जेल या दोनों का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 5 हजार रुपये तक के जुर्माने में बदलने का प्रस्ताव है।
यात्रियों में अनुशासन लाने पर जोर
सरकार का मानना है कि इन कड़े प्रावधानों से मेट्रो में साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही यात्रियों में नियमों के पालन को लेकर जागरूकता और अनुशासन भी बढ़ेगा।