बच्चे के जन्म के बाद काम पर लौटना कई महिलाओं के लिए पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन जब इस दौर में लंबी शिफ्ट और लगातार दबाव बना रहे, तो हालात और मुश्किल हो जाते हैं। गुड़गांव से सामने आए एक वायरल वीडियो ने इसी सच्चाई को उजागर किया है और वर्कप्लेस में नई माँओं के साथ व्यवहार को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।
पोस्टपार्टम के बीच आधी रात तक काम करती दिखी नई माँ
इंस्टाग्राम हैंडल @lifeworklullaby पर शेयर किए गए इस वीडियो में एक व्यक्ति अपनी पत्नी को रात 1:30 बजे लैपटॉप पर काम करते हुए दिखाता है। महिला हाल ही में माँ बनी है और पोस्टपार्टम रिकवरी के दौर से गुजर रही है। वीडियो के कैप्शन में लिखा गया, “कॉर्पोरेट टॉक्सिसिटी सच है। यह ठीक तब की बात है जब वह अपने पोस्टपार्टम से निपट रही थी।” वीडियो में पति ऑफिस की डिमांड और सपोर्ट की कमी पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि उसकी मैनेजर ने उसकी ज़िंदगी “नरक” बना दी है।
‘नई माँ से 16 घंटे काम की उम्मीद क्यों?’
वीडियो में पति यह सवाल भी उठाते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद कंपनियां महिलाओं से आखिर क्या उम्मीद करती हैं। वह कहते हैं, “एक नई माँ से क्या यह उम्मीद की जाती है कि वह बच्चे की देखभाल भी करे और 16-16 घंटे काम भी?” यह सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है।
काबिलियत पर सवाल या सिस्टम की नाकामी?
पति वीडियो में यह भी बताते हैं कि उनकी पत्नी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं—जिसे भारत की सबसे कठिन प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन में से एक माना जाता है। इसके बावजूद, काम का दबाव ऐसा है कि अब उसे अपनी स्किल्स पर ही शक होने लगा है। उनके मुताबिक, समस्या उसकी क्षमता नहीं, बल्कि वे हालात हैं जिनमें उससे काम कराया जा रहा है। वह कहते हैं कि जो व्यक्ति डिटेल्ड ऑडिट जैसे जटिल काम संभाल सकता है, उसे यह महसूस कराया जा रहा है कि वह अपनी नौकरी और एक माँ की भूमिका को साथ नहीं निभा सकती।
‘ग्लोबल वर्क कल्चर’ पर सीधा हमला
वीडियो में तथाकथित “ग्लोबल वर्क कल्चर” की भी तीखी आलोचना की गई है। पति का कहना है कि अगर कोई वर्कप्लेस मातृत्व के दौरान महिलाओं को सपोर्ट नहीं करता, तो उसे आधुनिक या ग्लोबल नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, इंसानी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर इस तरह के माहौल को ग्लोबल कहना, तरक्की नहीं बल्कि टॉक्सिक सिस्टम को बढ़ावा देना है।
सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद इंस्टाग्राम पर तेज़ी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में यूज़र्स ने नई माँ के प्रति समर्थन जताया और पति के खुलकर बोलने की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि वीडियो में वही अनुभव दिखाए गए हैं, जिनसे वे खुद या उनके करीबी लोग मैटरनिटी लीव के बाद गुज़र चुके हैं।
यूज़र्स बोले—गलती महिला की नहीं, सिस्टम की है
एक यूज़र ने कमेंट किया कि महिला करियर और बच्चे दोनों संभाल सकती है, लेकिन 16 घंटे काम कराना और मैनेजर का संवेदनहीन रवैया असली समस्या है। उसने लिखा कि नौकरी छोड़ना हर परिवार के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता और इस हालात के लिए महिला को दोषी ठहराना गलत है।
एक अन्य यूज़र ने कहा, “सिर्फ नई माँ ही नहीं—किसी के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।” वहीं, एक और कमेंट में लिखा गया, “नई माँ हो या नहीं, रात 1 बजे काम करना सीधा बर्नआउट है।” यह वायरल वीडियो एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ले आया है कि क्या भारतीय कॉर्पोरेट सिस्टम वास्तव में वर्क-लाइफ बैलेंस और मातृत्व के प्रति संवेदनशील है, या फिर ‘ग्लोबल वर्क कल्चर’ के नाम पर दबाव को सामान्य बना दिया गया है।