मिट्टी का एक ऐसा जग जिसके सामने RO भी फेल

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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकल फॉर वोकल के नारे से प्रेरित होकर अमृत माटी इंडिया ट्रस्ट ने मिट्टी के एक ऐसे जग का पानी का आविष्कार किया है जिसमें अमलीय पानी को क्षारिय पानी यानी गुणवत्तायुक्त पानी में बदलने की अद्भुत क्षमता हैं।

इस जग को ट्रस्ट की ओर से पूर्ण वैज्ञानिक पद्धति को अपनाते हुए तैयार किया गया है। इस नवाचार से आमजन को उच्च क्वालिटी का एल्कालाईन पानी उपलब्ध हो सकेगा। ट्रस्ट के चेयरमैन अंजनी किरोड़ीवाल ने बताया कि मिट्टी पर अनुसंधान कर देश में पहली बार मिट्टी से बना एल्कालाईन वॉटर जग का निर्माण किया गया है। जिसे आईआईटी रूडक़ी ने विभिन्न परीक्षणों के बाद प्रमाणित भी कर दिया। किरोड़ीवाल के अनुसार ट्रस्ट का उद्देश्य था कि एल्कालाईन पानी के यूनिट बाजार में 50 हजार से कई लाखों में उपलब्ध होती है।

जिसे हर व्यक्ति इस्तेमाल नहीं कर पाता। ऐसे में आमजन बीमारियों को न्योता देने वाले पानी को पीने को मजबूर है। जन-जन की इस समस्या को ध्यान मे रखते हुए जनसाधारण तक एल्कालाईन वाटर उपलब्ध करवाने की दिशा में इस एल्कालाईन वॉटर जग का निर्माण किया गया। जो कि बहुत मामूली कीमत 1000 रुपए तक ट्रस्ट उपलब्ध करवाएगा। यह किसी भी प्रकार के पानी को बीआईएस स्टैण्ड्डर्स के अनुसार 7.51 प्रतिशत तक पीएच लेवल का पानी उपलब्ध करवाने में समर्थ है।

पानी की शुद्धता को नापने के लिए 1913 में जर्मनी में डॉ. ऑटो ने एक सिद्धांत की रचना की थी, जिसे नाम दिया गया पीएच लेवल। डॉ.ऑटो को इस आविष्कार के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। वह कहते हैं कि जिस किसी व्यक्ति का पीएच लेवल 7 है तो वह न्यूट्रल है ना ठीक है ना बीमार है। जिस किसी इंसान का पीएच लेवल 7 से नीचे की ओर आ रहा है तो वह व्यक्ति एसिडिक कल्चर में हैं जिसे तमाम बीमारियां होने की संभावना है। जिस किसी व्यक्ति का पीएच लेवल 7 से ऊपर जा रहा है वह व्यक्ति एल्कालाईन कल्चर में आ जाता है। जिसे भविष्य में कोई भी गंभीर बीमारी नहीं हो सकती है। इसी सिद्धांत के अनुसार जग का निर्माण किया गया ताकि पीने योग्य पानी हर आम को उपलब्ध हो सके।

आईआईटी रूडक़ी के वैज्ञानिकों ने दो तरह के सैम्पल एसेडिक वाटर के लिए जिसका पीएच मान 2.20 एवं 3.50 था इस पानी को एल्कालाईन जग में डालकर तत्काल निकालने का पीएच मान 4.89 एवं 6.97 हो गया। इसी प्रकार तीन सैम्पल आरओ वॉटर के लिए गए जिनका पीएच मान क्रमश: 4.90, 4.23 व 4.85 था जिसे जग में डालकर तत्काल निकालने पर पीएच मान आया 7.52, 6.72 व 7.12।

आईआईटी रूडक़ी में जल एवं नवीकरण ऊर्जा विभाग के प्रोफेसर संजीव कुमार की देखरेख में ये सारे टेस्ट किए गए थे। इन वैज्ञानिकों ने आरओ वॉटर को लेकर चार और टेस्ट किए जिसका पीएच मान क्रमश: 4.85,4.85,4.85 व 4.93 था जिनमे से एक को 30 मिनट रखा तो वह वॉटर वीएच मान 7.60 में तब्दील हो गया। इसी तरह दूसरा 90 मिनट रखा गया जिसका मान बदलकर 7.63 हो गया। तीसरे व चौथे आरओ वॉटर को 6 घंटे के लिए जग में रखा गया जिसका पीएच मान क्रमश: 7.70 व 7.52 में बदल गया। इस टेस्ट के बाद पानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंण्डर्स के तहत आईएस 10500-2012 के मपदण्डों के अनुसार पाया गया। रूडक़ी के वैज्ञानिकों के अनुसार एल्कालाईन वॉटर जग पानी के पीएच लेवल को बढ़ाने में पूर्णत: सक्षम माना और रूडक़ी ने जयपुर के एक कुम्हार के इस शोध पर अपनी मुहर लगा दी।

जैसे पाचनतंत्र सुधारे, शरीर से विषैले तत्व निकाले, लिक्विड एसिड खत्म करे, डीएनए को सही रखे, कैंसर की रोकथाम में सहायक, दमकती त्वचा, हार्मोन्स संतुलित करे, फ्लोराईड का प्रभाव खत्म कर सके, एण्टी-ऑक्सीडेन्ट्स, बढ़ती उम्र का प्रभाव रोके, रक्त संचरण बढ़ाए, हाईड्रेशन सहायक, वजन कम करने में सहायक, हड्यिों का क्षरण रोके और पीएच संतुलित रखे।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में ही अमृत माटी ने विशेष प्रकार के मिट़टी के बर्तनोंं का आधुनिक तकनीक से निर्माण कर लेबोट्ररी से जांच करवाई थी जो अन्य किसी भी बरतनों के मुकाबले चार गुणा तक अधिक पोषक तत्व प्राप्त करने में सक्षम है।

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