UGC Bill के नए संशोधनों पर क्यों मचा है घमासान? जानें वो 4 नियम जिन पर अटका है पूरा विवाद

0 361

UGC Bill 2026 Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाए गए “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” पर सरकार और कई सामाजिक संगठनों के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई है। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। विवाद इतना बढ़ गया है कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

UGC Promotion of Equity Regulations: क्या है नया नियम
13 जनवरी को जारी UGC की अधिसूचना के मुताबिक अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) और समानता समितियों का गठन अनिवार्य होगा। इन समितियों में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। इनका काम कैंपस में किसी भी तरह के भेदभाव की निगरानी और जांच करना होगा। हॉस्टल, कैंटीन और विभागों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ‘इक्विटी स्क्वॉड’ बनाए जाएंगे और छात्रों में से ‘इक्विटी एंबेसडर’ भी नियुक्त किए जाएंगे। किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर समिति की बैठक बुलाना और तय समय में कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर UGC फंडिंग और सरकारी योजनाओं पर रोक लगा सकता है।

क्या है EOC और इसका काम
समान अवसर केंद्र केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका काम वंचित वर्गों के लिए बनी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना, जरूरतमंद छात्रों को कानूनी सहायता दिलाने के लिए जिला और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से समन्वय करना और कैंपस में सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, जागरूकता कार्यक्रम और ऑनलाइन पोर्टल तैयार करना होगा।

विवाद की असली जड़ क्या है

पहला नियम: Equity Committee और Equity Squad
नए नियमों के तहत Equity Committee और Equity Squad का गठन अनिवार्य किया गया है, लेकिन इनमें सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। छात्रों और शिक्षकों का आरोप है कि इक्विटी स्क्वॉड को जरूरत से ज्यादा निगरानी अधिकार दिए गए हैं, जिससे सामान्य सामाजिक गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

दूसरा नियम: 24×7 हेल्पलाइन और झूठी शिकायतों की आशंका
नियमों में चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre की व्यवस्था की गई है। आरोप है कि 2026 के नियमों में झूठी या द्वेषपूर्ण शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं रखा गया है, जो पहले ड्राफ्ट में मौजूद था। इससे किसी भी व्यक्ति पर बिना ठोस सबूत आरोप लगने और उसकी छवि व करियर को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

तीसरा नियम: SC, ST और OBC तक सीमित परिभाषा
नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों तक सीमित रखी गई है। इसी बात को लेकर सामान्य वर्ग में सबसे ज्यादा नाराजगी है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में इस्तीफा तक दे दिया। विरोध करने वालों का कहना है कि कानून सभी वर्गों के लिए समान सुरक्षा देने वाला होना चाहिए।

चौथा नियम: फंड रोकने और मान्यता रद्द करने का अधिकार
यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो UGC को उसकी मान्यता रद्द करने या सरकारी अनुदान रोकने का अधिकार होगा। शिक्षण संस्थानों का मानना है कि इससे उन पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा और इस शक्ति का दुरुपयोग भी हो सकता है।

रोहित वेमुला और पायल ताडवी केस का संदर्भ
UGC ने ये नियम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद बनाए हैं, जो रोहित वेमुला और पायल ताडवी की माताओं की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। कोर्ट ने UGC से पूछा था कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ठोस तंत्र क्या है।

आगे क्या है चुनौती
बढ़ते विरोध और कानूनी चुनौती के बीच सरकार के सामने संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। एक ओर सामाजिक न्याय और समावेशन का सवाल है, तो दूसरी ओर सभी वर्गों का भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है। माना जा रहा है कि सरकार नियमों में संशोधन या अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी कर विवाद को शांत करने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल, UGC के नए नियम उच्च शिक्षा में समानता का बड़ा कदम साबित होंगे या नया विवाद खड़ा करेंगे, इसका फैसला आने वाले दिनों में अदालत और सरकार के रुख से तय होगा।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.