भारत ने रोकी चीनी सप्लाई तो नेपाल में बढ़ी बेचैनी, खपत से आधा है उत्पादन; सरकार बोली- 8 महीने का स्टॉक मौजूद

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काठमांडू: भारत सरकार द्वारा चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगाने के फैसले के बाद नेपाल में चिंता का माहौल बन गया है। नेपाल के बाजारों में लोगों के बीच चीनी की संभावित कमी और कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर आशंका बढ़ गई है। हालांकि नेपाल सरकार लगातार भरोसा दिलाने में जुटी है कि देश में फिलहाल पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले आठ महीनों तक चीनी की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।

नेपाल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भारत से चीनी आयात करता है। ऐसे में भारत के इस फैसले ने वहां के कारोबारियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

नेपाल सरकार ने दिया भरोसा

नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि देश में फिलहाल चीनी की कोई कमी नहीं होगी। मंत्रालय के मुताबिक सरकारी एजेंसियों और निजी चीनी उद्योगों के पास इतना स्टॉक मौजूद है कि अगले आठ महीने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है।

सरकार ने कहा कि व्यापारियों और चीनी उत्पादकों के साथ हुई बैठक में सभी पक्षों ने भरोसा दिलाया है कि सप्लाई व्यवस्था सामान्य बनी रहेगी और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी।

भारत के फैसले से क्यों बढ़ी टेंशन?

दरअसल भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 30 सितंबर तक निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है। भारत दुनिया के बड़े चीनी निर्यातकों में शामिल है और नेपाल जैसे पड़ोसी देश काफी हद तक भारतीय सप्लाई पर निर्भर हैं।

भारत के फैसले के बाद नेपाल में यह आशंका बढ़ गई है कि आने वाले समय में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और बाजार में संकट पैदा हो सकता है।

उत्पादन से दोगुनी है नेपाल की जरूरत

नेपाल के मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश में चीनी उत्पादन लगातार घट रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नेपाल का वार्षिक चीनी उत्पादन घटकर करीब 1 लाख 20 हजार टन रह गया है, जबकि पहले यह लगभग 1 लाख 55 हजार टन था।

इसके विपरीत देश में हर साल करीब 2 लाख 70 हजार टन चीनी की मांग रहती है। यानी नेपाल की खपत उसके उत्पादन से दोगुने से भी ज्यादा है।

रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में हर महीने लगभग 20 से 25 हजार टन चीनी की जरूरत पड़ती है। वहीं दशैं, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मांग बढ़कर करीब 30 हजार टन तक पहुंच जाती है।

सरकार ने जमाखोरी पर दी चेतावनी

नेपाल सरकार ने साफ किया है कि बाजार में कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे जरूरत से ज्यादा चीनी जमा न करें, क्योंकि इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

सरकारी एजेंसियों का कहना है कि फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड और साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड समेत निजी उद्योगों के पास मौजूद स्टॉक से फिलहाल स्थिति संभाली जा सकती है।

त्योहारों से पहले बढ़ सकती है चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत की निर्यात पाबंदी लंबी चली तो नेपाल के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासकर त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने पर सरकार को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं।

फिलहाल नेपाल सरकार लोगों को आश्वस्त करने में जुटी है, लेकिन बाजार में बढ़ती चिंता यह दिखा रही है कि भारत के फैसले का असर पड़ोसी देशों तक पहुंच चुका है।

 

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