UP Heatwave Alert: भीषण गर्मी से यूपी में स्कूल बंद, कानपुर में 31 मई तक छुट्टी, कई जिलों में प्रशासन अलर्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। मौसम विभाग की हीटवेव चेतावनी के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया गया है।
प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों में अवकाश घोषित करना शुरू कर दिया है।
कानपुर में 31 मई तक स्कूल बंद
कानपुर जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार जिले के सभी प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 8 तक के स्कूल 31 मई 2026 तक बंद रहेंगे।
यह आदेश जिले के सभी बोर्डों के स्कूलों पर लागू होगा। इसमें CBSE, ICSE, यूपी बोर्ड समेत सभी मान्यता प्राप्त विद्यालय शामिल हैं।
प्रशासन का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अवकाश घोषित किया गया है।
लखनऊ, वाराणसी और आगरा में भी असर
राजधानी लखनऊ में 15 जून तक स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं वाराणसी में सभी स्कूल 25 मई तक बंद रहेंगे।
आगरा में भी प्रशासन ने गर्मी को देखते हुए स्कूल बंद करने का फैसला लिया है। लगातार बढ़ते तापमान और लू की स्थिति को देखते हुए अन्य जिलों में भी इसी तरह के फैसले लिए जा सकते हैं।
हीटवेव को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में प्रदेश के कई जिलों में लू और अत्यधिक गर्म हवाएं चलने की आशंका जताई है। दिन के समय तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे बच्चों पर हीटवेव का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लंबे समय तक गर्मी और धूप में रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
सख्ती से लागू होगा आदेश
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि सभी स्कूलों को आदेश का सख्ती से पालन करना होगा। संबंधित अधिकारियों को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। वहीं अभिभावकों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे बच्चों के हित में उठाया गया जरूरी कदम बताया है।