केरल में जमीन विवाद पर बढ़ा बवाल, दलित परिवारों को 23 मई तक हटाने का आदेश; पुलिस कार्रवाई पर सियासत तेज
कोच्चि: केरल के एर्नाकुलम जिले के किझक्कंबलम इलाके में जमीन विवाद को लेकर तनाव गहरा गया है। परीयाथुकावु क्षेत्र में रह रहे दलित परिवारों को हटाने के अदालत के आदेश के बाद मामला अब राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। पेरुंबवूर मुंसिफ कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि 23 मई तक इलाके में रह रहे 7 से 8 दलित परिवारों को जमीन खाली कराई जाए।
स्थानीय विरोध के बीच रुकी कार्रवाई
अदालत का यह आदेश एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर आया है। रिपोर्ट में बताया गया कि बुधवार को परिवारों को हटाने की कोशिश स्थानीय लोगों के भारी विरोध के चलते पूरी नहीं हो सकी।
इसके बाद पुलिस की बड़ी टीम दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस करीब ढाई एकड़ जमीन खाली कराने गई थी। अधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस जमीन का मालिकाना हक किसी अन्य व्यक्ति के पास है।
हालांकि जैसे ही पुलिस और प्रशासनिक टीम इलाके में पहुंची, स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा।
कई लोग हिरासत में, 50 पर केस दर्ज
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में पुलिस ने करीब 50 लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।
थडियिट्टापरम्बु पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों पर सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
CPM ने बनाई सुरक्षा समिति
मामले को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। CPM ने गुरुवार को इलाके में एक सुरक्षा समिति बनाने का ऐलान किया, ताकि प्रभावित परिवारों को आगे होने वाली कार्रवाई से बचाया जा सके।
CPM के वरिष्ठ नेता पी. राजीव ने इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि पिछली एलडीएफ सरकार ने वहां रह रहे लोगों को नियमों के तहत जमीन का अधिकार देने की योजना बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के कारण सर्वे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
राजीव ने पुलिस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों की सुरक्षा के लिए जन आंदोलन जरूरी हो गया है।
गृह मंत्री ने मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी पुलिस कार्रवाई की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने राज्य पुलिस प्रमुख रवाडा चंद्रशेखर को निर्देश दिया है कि तीन दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपी जाए।
गृह मंत्री ने कहा कि जांच में यह देखा जाएगा कि पुलिस की ओर से किसी प्रकार की चूक हुई या नहीं। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए जरूरी सुझाव भी मांगे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
यह जमीन विवाद कई वर्षों से अदालतों में चल रहा है। जिस जमीन पर दलित परिवार लंबे समय से रह रहे हैं, उस पर एक अन्य व्यक्ति ने मालिकाना हक का दावा किया था।
अदालती सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति के मालिकाना अधिकार को सही माना था। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने उसके अधिकार लागू कराने के निर्देश दिए, जिसके आधार पर अब बेदखली अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं प्रभावित परिवारों का कहना है कि जिस जमीन पर वे रह रहे हैं, वह सरकारी जमीन है, निजी नहीं। हालांकि उनकी ओर से दायर सभी याचिकाएं अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।