बिना बोले ही हुमा कुरैशी ने ‘बेबी डू डाई डू’ में चलाया अभिनय का ‘छाता’, खामोशी के शोर में छुपा है तगड़ा सस्पेंस
मुंबई। इस शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म बेबी डू डाई डू सस्पेंस, थ्रिलर और डार्क ह्यूमर का ऐसा मिश्रण पेश करती है, जो पारंपरिक बॉलीवुड फिल्मों से अलग नजर आता है। निर्देशक नचिकेत सामंत की यह फिल्म अपनी अनोखी कहानी, दमदार विजुअल्स और खासकर हुमा कुरैशी के प्रभावशाली अभिनय की वजह से चर्चा में है।
फिल्म की कहानी बेबी करमरकर नाम की एक ऐसी युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बोल और सुन नहीं सकती। बचपन में अपनी जुड़वा बहन की हत्या की दर्दनाक घटना देखने के बाद उसके भीतर बदले की आग सुलगती रहती है। समय के साथ वह एक पेशेवर सुपारी किलर बन जाती है और अपने अतीत के सबसे बड़े दुश्मन की तलाश में निकल पड़ती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हुमा कुरैशी का अभिनय है। बिना एक भी संवाद बोले उन्होंने सिर्फ आंखों, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए अपने किरदार को जीवंत बना दिया है। एक्शन, दर्द, गुस्सा और भावनात्मक दृश्यों में उनका प्रदर्शन फिल्म को मजबूती देता है।
सहायक कलाकारों में चंकी पांडे ने एक गंभीर और खतरनाक गैंग लीडर के रूप में प्रभावित किया है। सिकंदर खेर, सीमा पाहवा और रचित सिंह ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ कहानी को मजबूती दी है।
तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। बारिश से भीगी मुंबई, अंधेरी गलियां और रहस्यमयी लोकेशन कहानी के माहौल को और प्रभावी बनाती हैं। बैकग्राउंड स्कोर और एडिटिंग भी फिल्म की गति बनाए रखने में सफल रहते हैं।
हालांकि, फिल्म का शुरुआती हिस्सा थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है और कहानी को सेटअप करने में समय लगता है। लेकिन इंटरवल के बाद घटनाक्रम तेजी पकड़ता है और एक के बाद एक कई चौंकाने वाले मोड़ सामने आते हैं। क्लाइमैक्स फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा माना जा सकता है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।
कुल मिलाकर बेबी डू डाई डू एक साहसिक और अलग तरह की थ्रिलर है, जो सस्पेंस पसंद करने वाले दर्शकों को निराश नहीं करेगी। अगर आप पारंपरिक मसाला फिल्मों से हटकर कुछ नया और रोमांचक देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
रेटिंग: 3.5/5