राम मंदिर दान चोरी विवाद में नया मोड़, कोषाध्यक्ष गोविंददेव ने पूर्व महासचिव चंपत राय की कार्यशैली पर उठाए सवाल
अयोध्या: राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच आगे बढ़ने के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने पूर्व महासचिव चंपत राय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में आई शिथिलता और अत्यधिक केंद्रीकरण के कारण इतनी बड़ी स्थिति पैदा हुई। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को दोषी ठहराना उनका काम नहीं है और अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर होगा।
‘व्यवस्था का विकेंद्रीकरण नहीं होने से बढ़ी समस्या’
गोविंददेव गिरी ने कहा कि पूरे कामकाज को एक ही स्तर पर नियंत्रित करने के बजाय जिम्मेदारियों का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार निगरानी व्यवस्था कमजोर रही और कुछ लोगों पर अत्यधिक भरोसा किए जाने से ऐसी परिस्थितियां बनीं। उन्होंने कहा कि पहले भी इस तरह की चर्चाएं होती थीं, लेकिन उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
दानपात्र की जिम्मेदारी पर भी दिया जवाब
कोषाध्यक्ष ने कहा कि दानपात्रों की व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित पदाधिकारियों की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल उस धनराशि तक सीमित है, जो आधिकारिक रूप से कोष में जमा हो जाती है। उसके बाद धन का सुरक्षित प्रबंधन और नियमानुसार व्यय करना उनकी जिम्मेदारी है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की तैयारी
उन्होंने बताया कि भविष्य में व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए ट्रस्ट मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति करेगा। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो उपयुक्त नामों का प्रस्ताव ट्रस्ट के समक्ष रखेगी। प्रस्तावित नामों में से एक व्यक्ति का चयन किया जाएगा।
‘अपराधी को दंड मिलना चाहिए’
गोविंददेव गिरी ने कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए। उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं पर गहरी चोट बताया। साथ ही उन्होंने अपील की कि इस मामले को लेकर समाज में विभाजन या मंदिर के प्रति श्रद्धा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
एसआईटी जांच पर टिप्पणी से किया परहेज
कोषाध्यक्ष ने कहा कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट पर टिप्पणी करना उनका दायित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी जिस निष्कर्ष पर पहुंचेगी, उसी के आधार पर दोष तय होगा। किसी व्यक्ति को पहले से दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं है।
बैंक बदलने के सवाल पर भी रखा पक्ष
ट्रस्ट के बैंकिंग प्रबंधन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी प्रतिष्ठित बैंक को इस मामले में दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि कहीं चूक हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्यों के किसी संस्था पर आरोप लगाना सही नहीं है।