नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
याचिका चिराग हरिवंदन मोदी द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार को जाति जनगणना रोकने के निर्देश देने की मांग की गई थी। साथ ही एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक लाभ देने के लिए नीति बनाने का भी अनुरोध किया गया था।
सुनवाई के दौरान भाषा को लेकर सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिका की भाषा और शैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने याचिकाकर्ता से स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और याचिका तैयार करते समय मर्यादा का पालन जरूरी है। अदालत की इस टिप्पणी से यह साफ संकेत मिला कि न्यायालय शालीन भाषा को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।
दो चरणों में होगी जनगणना, दूसरे चरण में जाति गणना
केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि देश में जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहले चरण में मकानों की सूची और उनसे जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जाति जनगणना की जाएगी। गृह मंत्रालय द्वारा पहले चरण के लिए 33 प्रश्न तय किए जा चुके हैं, जिनमें परिवार, संसाधन और जीवन स्तर से जुड़े कई पहलू शामिल हैं।
एक ही अधिवक्ता की कई याचिकाओं पर भी सख्ती
इसी दिन सर्वोच्च न्यायालय ने अधिवक्ता सचिन गुप्ता द्वारा दाखिल 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता को फिलहाल अपने पेशे पर ध्यान देना चाहिए और उचित समय आने पर ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद अधिवक्ता को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी गई।
इन याचिकाओं में हथियारों के उपयोग पर नीति बनाने और कानून संबंधी जागरूकता बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल थे।