यूपी में गांवों के नाम को लेकर विवाद, ‘चमारी’ और ‘चमरौली’ नाम बदलने की उठी मांग

0 81

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गांवों के नाम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। यूपी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने जालौन जिले के एक गांव का नाम ‘चमारी’ होने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसका नाम बदलने की मांग की है।

डॉ. निर्मल का कहना है कि आजादी के 79 साल बाद भी यदि किसी गांव का नाम इस तरह रखा गया है, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है। उनके मुताबिक इससे यह संकेत मिलता है कि वहां रहने वाले जिम्मेदार लोगों को इस मुद्दे से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे नामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के नाम सामाजिक संवेदनाओं को प्रभावित करते हैं और इन्हें बदलने की दिशा में पहल होनी चाहिए।

उन्नाव में भी ‘चमरौली’ नाम के गांव का जिक्र

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया कि सिर्फ जालौन ही नहीं, बल्कि उन्नाव जिले में भी ‘चमरौली’ नाम का एक गांव है। उन्होंने कहा कि ऐसे नामों को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए और समाज के सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखेंगे नाम बदलने की मांग

पूर्व एमएलसी ने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इन गांवों के नाम बदलने का आग्रह करेंगे। उनका कहना है कि सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी ने कभी दलितों का दर्द नहीं झेला था, जबकि डॉ. अंबेडकर ने दलित समाज की पीड़ा को खुद महसूस किया और उसे करीब से जिया था।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.