कर्नाटक में आज डीके शिवकुमार का राज्याभिषेक, नई कैबिनेट की तस्वीर लगभग साफ; जानिए कौन-कौन बन सकता है मंत्री

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बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में बुधवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार आज शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब वह राज्य की बागडोर संभालेंगे। यह नेतृत्व परिवर्तन वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद हो रहा है। पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को नई जिम्मेदारी देते हुए कांग्रेस कार्य समिति का सदस्य नियुक्त किया है।

शपथ ग्रहण समारोह शाम 4 बजकर 5 मिनट पर आयोजित किए जाने की तैयारी है। इसी के साथ नई सरकार के पहले चरण के मंत्रिमंडल की तस्वीर भी लगभग स्पष्ट होती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के साथ कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।

यतींद्र सिद्धारमैया का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में

संभावित मंत्रियों की सूची में यतींद्र सिद्धारमैया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वह पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र हैं और पेशे से पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर रहे हैं। मैसूरु की वरुणा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके यतींद्र वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. जी. परमेश्वर को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली दलित नेताओं में शामिल डॉ. जी. परमेश्वर भी संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुख नाम हैं। संगठन और सरकार दोनों में लंबे अनुभव वाले परमेश्वर कई बार विधायक रह चुके हैं। वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, गृह मंत्री और राज्य के पहले दलित उपमुख्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वर्तमान सरकार में भी वे गृह विभाग संभाल रहे थे।

यू. टी. खादर पर भी नजर

राज्य के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाने वाले यू. टी. खादर का नाम भी चर्चा में है। वह कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और स्वास्थ्य, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह विधानसभा अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।

के. जे. जॉर्ज का अनुभव बन सकता है बड़ी ताकत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. जे. जॉर्ज लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय हैं। गृह, ऊर्जा और बेंगलुरु विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का अनुभव रखने वाले जॉर्ज को नई कैबिनेट में अहम भूमिका मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कृष्णा बायरे गौड़ा और एम. बी. पाटिल भी दौड़ में आगे

नीतिगत समझ और प्रशासनिक अनुभव के लिए पहचाने जाने वाले कृष्णा बायरे गौड़ा का नाम भी संभावित मंत्रियों में शामिल है। वहीं एम. बी. पाटिल को कांग्रेस का प्रमुख लिंगायत चेहरा माना जाता है। जल संसाधन और उद्योग विभागों में उनके कार्यकाल को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

युवा चेहरे के तौर पर प्रियांक खरगे पर फोकस

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र और पार्टी के प्रमुख युवा दलित नेता प्रियांक खरगे भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। चित्तापुर से लगातार विधायक चुने जा रहे प्रियांक विभिन्न विभागों का जिम्मा संभाल चुके हैं और पार्टी नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।

सतीश जारकीहोली और रामलिंगा रेड्डी भी मजबूत दावेदार

आदिवासी समुदाय के प्रभावशाली नेता सतीश जारकीहोली का नाम भी संभावित सूची में है। वहीं बेंगलुरु की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले रामलिंगा रेड्डी को भी नई सरकार में महत्वपूर्ण स्थान मिलने की संभावना है। दोनों नेताओं का संगठन और सरकार में लंबा अनुभव रहा है।

वरिष्ठ दलित नेता केएच मुनियप्पा को मिल सकता है मौका

सात बार लोकसभा सांसद रह चुके केएच मुनियप्पा कांग्रेस के वरिष्ठ दलित नेताओं में गिने जाते हैं। केंद्र सरकार में मंत्री रहने का अनुभव रखने वाले मुनियप्पा वर्तमान राज्य सरकार में भी महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं।

दिनेश गुंडू राव और ईश्वर खंडरे पर भी चर्चा

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव तथा हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के प्रभावशाली लिंगायत नेता ईश्वर खंडरे भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। दोनों नेताओं को संगठन और प्रशासन का व्यापक अनुभव प्राप्त है।

बैरती सुरेश भी हो सकते हैं मंत्रिमंडल का हिस्सा

सिद्धारमैया के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले बैरती सुरेश का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। वह बेंगलुरु क्षेत्र से मजबूत राजनीतिक आधार रखते हैं और पूर्व में कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल चुके हैं।

पहले चरण में सीमित मंत्रिमंडल, बाद में होगा विस्तार

सूत्रों के अनुसार नई सरकार के पहले चरण में सीमित संख्या में मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। इसके बाद क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। ऐसे में आज होने वाला शपथ ग्रहण केवल सत्ता परिवर्तन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कर्नाटक में कांग्रेस के अगले राजनीतिक अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है।

 

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