बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय, 7 मई को होगा शपथ ग्रहण समारोह, NDA कोटे से बन सकते हैं 27 मंत्री

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पटना: बिहार की नई एनडीए सरकार में लंबे इंतजार के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। जानकारी के मुताबिक, राज्य में 7 मई को कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह पटना के गांधी मैदान में आयोजित होने की तैयारी है। इसे लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ लेने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें चल रही थीं। अब सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं पीएम मोदी और अमित शाह

सूत्रों के अनुसार, 7 मई को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी कार्यक्रम को लेकर जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि समारोह को भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली पहुंचकर अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात भी की थी, जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिए जाने की चर्चा तेज हो गई।

बीजेपी और जदयू के खाते में जा सकते हैं सबसे ज्यादा मंत्रालय

सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा जदयू से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव उपमुख्यमंत्री के तौर पर शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, इस बार करीब 27 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। इनमें बीजेपी के खाते में सबसे ज्यादा 12 मंत्री पद जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं जदयू से 11 नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 2 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वहीं HAM-RLM गठबंधन से भी एक मंत्री को शपथ दिलाई जा सकती है।

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज

बिहार में कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। एनडीए के भीतर विभिन्न दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे और नए चेहरों को लेकर लगातार मंथन चल रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में कई नए और संतुलित चेहरे देखने को मिल सकते हैं।

 

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