‘सुपर अल नीनो’ से दुनिया भर में मौसम का बिगड़ेगा संतुलन, कहीं भीषण गर्मी तो कहीं रिकॉर्ड तोड़ ठंड की आशंका

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नई दिल्ली। वर्ष 2026 के अंत तक एल नीनो के सक्रिय होने की संभावना के बीच वैश्विक मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, इस मौसमीय बदलाव के कारण दुनिया के कई हिस्सों में असामान्य गर्मी, सूखा, भारी बारिश और कुछ क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। कुल मिलाकर वैश्विक तापमान में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी के अनुसार, वर्तमान में जारी ला नीना की ठंडी अवस्था अब समाप्ति की ओर है, जिससे प्रशांत महासागर के तापमान के सामान्य स्तर पर पहुंचने और आगे चलकर एल नीनो की स्थिति बनने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। अमेरिकी मौसम एजेंसियों के अनुमान के अनुसार, 2026 के मध्य तक एल नीनो के विकसित होने की लगभग 66 प्रतिशत संभावना है, जो वर्ष के अंत तक प्रभावी रह सकता है।

वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी

विशेषज्ञों के अनुसार, एल नीनो सक्रिय होने पर वैश्विक औसत तापमान में लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस तक की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। यदि प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तो इसे मजबूत एल नीनो चरण माना जाएगा। इस स्थिति की संभावना करीब 33 प्रतिशत बताई जा रही है। इससे पहले 2015-16 में आए शक्तिशाली एल नीनो के दौरान वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ तेजी से पिघली थी और समुद्री तापमान में भी वृद्धि दर्ज की गई थी।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग असर

एल नीनो के प्रभाव से विभिन्न क्षेत्रों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रूप ले सकता है। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में सूखे की स्थिति और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं दक्षिण अमेरिका के पेरू और इक्वाडोर जैसे देशों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

भारत में इस दौरान मानसून की वर्षा कमजोर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर अमेरिका के गल्फ कोस्ट क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में अधिक नमी और बारिश देखने को मिल सकती है।

ब्रिटेन में कड़ाके की ठंड की आशंका

यूनाइटेड किंगडम मौसम विभाग के अनुसार, प्रशांत महासागर के गर्म होने का असर यूरोप के मौसम पर भी पड़ सकता है। इसके चलते ब्रिटेन में सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक ठंड पड़ने की संभावना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रभाव तुरंत नहीं बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे दिखाई देगा।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, एल नीनो और ला नीना जैसे समुद्री तापमान परिवर्तन वैश्विक जलवायु पर गहरा असर डालते हैं, जिनके प्रभाव कई महीनों से लेकर वर्षों तक महसूस किए जा सकते हैं।

 

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