गणतंत्र दिवस पर पहली बार महिला अग्निवीरों ने दिखाया दमखम, सैन्य साहस की हर तरफ हो रही चर्चा

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नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस ( 26 जनवरी ) की परेड इस बार कई मायनों में खास रही। एक तरफ भारत ने राफेल फाइटर जेट से लेकर भीष्मा टैंक तक का जोरदार प्रदर्शन किया तो वहीं इस साल पहली बार महिला अग्निवीरों ने अपना दमखम दिखाया। वायु सेना (IAF) के 72 सदस्यों के एक ग्रुप में खास तौर पर अग्निवीर महिला म्यूजिशियन को शामिल किया गया। उन्होंने कर्तव्य पथ पर साउंड बैरियर धुन बजाई। स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार के नेतृत्व में एयर फोर्स की मार्चिंग टुकड़ी ने 12×12 के फॉर्मेशन में मार्च किया।

भारतीय वायुसेना यानी IAF के बैंड में 72 म्यूजिशियन थे, जिसमें 57 पुरुष अग्निवीरों के साथ-साथ 9 महिला अग्निवीर थीं। इन्हें पहली बार परेड में शामिल किया गया था। इस ग्रुप में तीन ड्रम मेजर शामिल थे, जिनकी अगुवाई सार्जेंट चार्ल्स एंथनी डेनियल कर रहे थे। जब बैंड राष्ट्रपति के मंच के सामने से गुजरा तो उन्होंने ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाई। भारतीय वायु सेना ने 2026 के गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट के दौरान एक खास सिंदूर फॉर्मेशन दिखाया, जिसमें ‘स्पीयरहेड’ फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग-29, 2 Su-30 और 1 जगुआर शामिल थे। यह फॉर्मेशन ऑपरेशन सिंदूर में IAF की भूमिका को समर्पित था, जो पहलगाम में 22 अप्रैल के आतंकी हमले के बाद मई की शुरुआत में चार दिनों तक चला था।

नौसेना का गीत ‘जय भारती’ बजाया
IAF मार्चिंग दस्ते में चार अधिकारी (एक कंटिंजेंट कमांडर और तीन सुपरन्यूमरेरी अधिकारी) और 144 एयरमैन शामिल थे। कंटिंजेंट कमांडर की कमान स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार के पास थी, जबकि स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश सुपरन्यूमरेरी अधिकारी थे। एयर फोर्स का दस्ता IAF बैंड की धुन पर 12 गुणा 12 के फॉर्मेशन में मार्च करता है। नौसेना की झांकी में INSV तारिणी और INS विक्रांत को दिखाते हुए भारत की समुद्री विरासत और आत्मनिर्भरता को दिखाया गया। लेफ्टिनेंट करण नाग्याल के नेतृत्व में 144 कर्मियों ने नौसेना की ताकत और अनुशासन का प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना बैंड का नेतृत्व मास्टर चीफ पेटी ऑफिसर (म्यूजिशियन), फर्स्ट क्लास, एम एंटनी राज ने किया, जिन्होंने भारतीय नौसेना का गीत ‘जय भारती’ बजाया।

समुद्र में ताकतवर भारत
भारतीय नौसेना की झांकी की थीम थी ‘परंपरा में निहित, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन की ओर अग्रसर’। लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए और लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के ने झांकी का नेतृत्व किया, जिन्होंने INSV तारिणी पर सवार होकर दुनिया का चक्कर लगाया था और झांकी के आगे के हिस्से में ग्लोब के ऊपर उन्हें दिखाया गया था। जबकि प्राचीन फ्रिगेट INSV कौंडिन्य और मराठा नौसेना के जहाज ‘घुरब’ ने भारत की शुरुआती जहाज निर्माण क्षमता की याद दिलाई, वहीं शक्तिशाली विमानवाहक पोत INS विक्रांत के नेतृत्व में आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत और एयर प्लेटफॉर्म सैन्य आत्मनिर्भरता और समुद्री क्षमता का प्रतीक हैं।

भारत की तरक्की दिखाई
ये स्वदेशी युद्धपोत, जो टेक्नोलॉजिकल क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की तरक्की को दिखाते हैं। भारतीय नौसेना की ‘JAI’-जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन के जरिए जीत की ओर बढ़ते कदम को दर्शाते हैं। झांकी के साथ सी कैडेट कोर के युवा कैडेट भी चल रहे थे, जो भारत के भविष्य, युवाओं में समुद्री चेतना पैदा करने के भारतीय नौसेना के प्रयासों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

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