बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की हाई-प्रोफाइल मुलाकात, दुनिया की नजरें टिकीं; दोनों नेताओं ने दिए बड़े संकेत
बीजिंग: अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा तनाव के बीच गुरुवार को बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम मुलाकात हुई। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहीं।
बीजिंग स्थित ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और इसके बाद द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई। ट्रंप को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया।
दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी भी रहे मौजूद
बैठक के दौरान ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल और कैबिनेट सदस्यों का परिचय चीनी राष्ट्रपति से कराया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। वहीं चीनी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य भी वार्ता में शामिल रहे।
यह ट्रंप का 2017 के बाद पहला चीन दौरा माना जा रहा है। वह बुधवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे।
ट्रंप ने जिनपिंग को बताया ‘महान नेता’
वार्ता की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आने वाले समय में और मजबूत होंगे।
ट्रंप ने कहा कि उनकी और जिनपिंग की दोस्ती लंबे समय से रही है और दोनों नेताओं ने हर मुश्किल परिस्थिति को बातचीत के जरिए सुलझाया है। उन्होंने कहा कि चीन के लिए जिनपिंग ने जो काम किया है, उसके लिए वह उनका सम्मान करते हैं।
ट्रंप ने अपने स्वागत की भी जमकर तारीफ की और कहा कि यह ऐसा सम्मान है जिसे बहुत कम लोग देख पाते हैं। उन्होंने विशेष तौर पर स्वागत समारोह में मौजूद बच्चों और सैन्य व्यवस्था की प्रशंसा की।
‘यह ऐतिहासिक शिखर बैठक हो सकती है’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके साथ कई बड़े कारोबारी नेता भी चीन आए हैं, जो चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अमेरिका में लोग लगातार इस शिखर वार्ता पर नजर बनाए हुए हैं।
ट्रंप ने कहा कि कुछ लोग इसे अब तक की सबसे बड़ी शिखर बैठक मान रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि “आपका दोस्त होना मेरे लिए सम्मान की बात है।”
शी जिनपिंग बोले- प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार बनें
वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक के दौरान कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में दोनों देशों के रिश्तों का स्थिर रहना बेहद जरूरी है।
शी जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है। ऐसे में चीन और अमेरिका की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
‘क्या हम टकराव से बच सकते हैं?’
चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर कई अहम सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि क्या दोनों देश टकराव से बचते हुए सहयोग का नया मॉडल बना सकते हैं और क्या वे वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकते हैं।
उन्होंने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब उभरती ताकत और मौजूदा महाशक्ति के बीच तनाव बढ़ता है तो संघर्ष का खतरा पैदा होता है। ऐसे में चीन और अमेरिका को नई दिशा तय करनी होगी।
‘एक देश की सफलता दूसरे के लिए अवसर’
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन साझा हित उससे कहीं ज्यादा बड़े हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों देशों को फायदा होगा जबकि टकराव से नुकसान होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एक देश की सफलता दूसरे के लिए अवसर बन सकती है और दोनों देशों को मिलकर दुनिया में स्थिरता लाने की दिशा में काम करना चाहिए।
ट्रंप के सम्मान में होगा राजकीय भोज
बैठक के बाद शाम को राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान में राजकीय भोज का भी आयोजन किया जाएगा। ट्रंप के बीजिंग पहुंचने पर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने उनका स्वागत किया था। इस दौरान चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू भी मौजूद रहे।
चीन ने पहले ही अमेरिका को दी थी चेतावनी
ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले अमेरिका स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अमेरिका को कुछ संवेदनशील मुद्दों पर चेतावनी दी थी। चीन ने ताइवान, मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था और विकास के अधिकार को अपनी “रेड लाइन” बताया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।