अंग प्रत्यारोपण में ऐतिहासिक सफलता! सुअर के लिवर और किडनी ने मानव शरीर में किया काम, लाखों मरीजों के लिए जगी नई उम्मीद

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नई दिल्ली चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जिसे अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। चीन के वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की टीम ने पहली बार जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर के लिवर और दोनों किडनी को एक मानव शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए हैं। इस सफलता ने भविष्य में अंगों की कमी से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं।

दुनियाभर में हर वर्ष बड़ी संख्या में मरीज किडनी, लिवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन समय पर उपयुक्त दाता नहीं मिलने के कारण अनेक लोगों की जान चली जाती है। ऐसे में पशुओं के अंगों को मनुष्यों में प्रत्यारोपित करने की दिशा में चल रहा शोध लंबे समय से वैज्ञानिक समुदाय के लिए अहम विषय बना हुआ था। अब इस क्षेत्र में मिली नई सफलता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार यह प्रयोग 53 वर्षीय ब्रेन-डेड व्यक्ति पर किया गया। परिवार की सहमति मिलने के बाद चिकित्सकों ने जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर का लिवर और दोनों किडनी प्रत्यारोपित कीं। प्रत्यारोपण के बाद शुरुआती दिनों में अंगों की कार्यक्षमता और शरीर की प्रतिक्रिया पर लगातार निगरानी रखी गई।

शोधकर्ताओं के मुताबिक प्रत्यारोपण के बाद करीब पांच दिनों तक ये अंग सामान्य रूप से कार्य करते रहे और शरीर में किसी गंभीर अस्वीकृति प्रतिक्रिया के संकेत नहीं मिले। विशेष रूप से पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इस दौरान भी शरीर ने प्रत्यारोपित अंगों को अस्वीकार नहीं किया, जिसे वैज्ञानिकों ने सकारात्मक संकेत बताया है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रत्यारोपित लिवर ने पित्त का उत्पादन शुरू कर दिया, जबकि किडनियों ने शरीर में क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे महत्वपूर्ण जैविक तत्वों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाई। इससे संकेत मिला कि जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर के अंग मानव शरीर में बुनियादी जैविक कार्य करने की क्षमता रखते हैं।

जेनोट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता जेनोट्रांसप्लांटेशन यानी एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति है। खासतौर पर एक साथ कई अंगों का प्रत्यारोपण अत्यंत जटिल प्रक्रिया माना जाता है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया, संक्रमण और अन्य चिकित्सकीय चुनौतियां बड़ी बाधा होती हैं।

अभी और शोध की जरूरत

हालांकि वैज्ञानिक समुदाय इस उपलब्धि को उत्साहजनक मान रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीक को आम मरीजों पर लागू करने से पहले व्यापक और दीर्घकालिक अध्ययन आवश्यक हैं। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि पशु अंगों के जरिए किसी प्रकार के वायरस या संक्रमण का खतरा मानव शरीर तक न पहुंचे।

अंगों की कमी का मिल सकता है समाधान

दुनियाभर में अंग प्रत्यारोपण की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध दाताओं की संख्या सीमित है। ऐसे में यदि भविष्य में यह तकनीक पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह अंगों की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है और लाखों गंभीर मरीजों के जीवन को नई दिशा दे सकती है।

 

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