डीजल खरीद पर लगा नया प्रतिबंध! 200 लीटर से ज्यादा बिक्री पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
गौतमबुद्धनगर: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की आपूर्ति को लेकर अस्थायी विनियमन लागू किया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी स्मृति गौतम ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी इस आदेश का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और उपयोग को नियंत्रित करना है।
11 जून 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खुदरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से पेट्रोल और डीजल की खरीद पर कुछ विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनका पालन सभी संबंधित पक्षों के लिए अनिवार्य होगा।
संस्थागत और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर विशेष प्रतिबंध
नए आदेश के तहत संस्थागत, प्रत्यक्ष, औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता अब खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल या डीजल की खरीद नहीं कर सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी ईंधन संबंधी आवश्यकताएं केवल अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों के माध्यम से पूरी करनी होंगी।
डीजल बिक्री पर 200 लीटर की सीमा तय
अधिसूचना के अनुसार खुदरा बिक्री केंद्रों पर डीजल की बिक्री केवल वाहनों के टैंक या पीईएसओ से अनुमोदित कंटेनरों में ही की जा सकेगी। साथ ही किसी एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक हाई स्पीड डीजल नहीं बेचा जाएगा।
इसके अलावा खरीदे गए डीजल की पुनः बिक्री भी प्रतिबंधित रहेगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
तेल कंपनियों और डीलरों की बढ़ी जिम्मेदारी
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तेल विपणन कंपनियों और खुदरा विक्रय केंद्र संचालकों को इन प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही किसी भी प्रकार के उल्लंघन को रोकने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
90 दिनों तक प्रभावी रहेगा आदेश
यह आदेश जारी होने की तिथि से अधिकतम 90 दिनों की प्रारंभिक अवधि तक प्रभावी रहेगा या फिर किसी नए आदेश द्वारा निरस्त किए जाने तक लागू रहेगा। यदि निर्धारित अवधि के बाद भी इसकी आवश्यकता महसूस होती है तो अलग आदेश जारी कर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
जिला पूर्ति अधिकारी ने आमजन और संबंधित संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा है कि आदेश के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन पाए जाने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत विधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।