बजट 2026 को लेकर नई चर्चा, पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा

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नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026 से पहले टैक्स को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार शादीशुदा लोगों के लिए ‘संयुक्त कराधान’ यानी ज्वाइंट टैक्सेशन का विकल्प पेश कर सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पति और पत्नी मिलकर एक साथ आयकर रिटर्न भर सकेंगे। इससे खासकर उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जहां कमाई का जिम्मा एक ही व्यक्ति पर है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खासकर एकल कमाई वाले परिवारों को Tax में लाखों रुपये की बचत हो सकती है। बजट से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने वित्त मंत्रालय को बजट को लेकर एक खास सलाह दी है। उसने पति-पत्नी को संयुक्त रिटर्न फाइल का विकल्प देने की सलाह दी है। अभी पति और पत्नी को अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।

फिलहाल नई कर व्यवस्था ही आयकर रिटर्न के लिए डिफॉल्ट व्यवस्था है। हालांकि, करदाता पुरानी कर व्यवस्था को भी चुन सकते हैं। दोनों में ही टैक्स की अलग-अलग स्लैब हैं जहां आमदनी बढ़ने के साथ-साथ कर की दर बढ़ती हैं। नई टैक्स व्यवस्था के तहत जहां तीन लाख रुपये सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं है, वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये सालाना के लिए लागू है। दोनों में ही यह सीमा परिवार के हर एक सदस्य पर अलग-अलग लागू है।

बहुत से घर ऐसे होते हैं जहां एक ही व्यक्ति नौकरी या काम करता है। दूसरा जीवनसाथी घर, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करता है। यह काम भले ही बहुत अहम हो, लेकिन कर प्रणाली में इसकी कोई कीमत नहीं मानी जाती है। नतीजा यह होता है कि ऐसे परिवारों पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है।

मौजूदा समय में भारत में हर व्यक्ति को अपनी आय पर अलग-अलग कर देना होता है। चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बेसिक छूट, स्लैब और कटौतियां मिलते हैं। इस वजह से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे जीवनसाथी को कर छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता है।

इसका मतलब है कि शादीशुदा जोड़े अपनी कमाई को जोड़कर एक साथ आयकर रिटर्न फाइल करें। इसके लिए दोनों के पास पैन कार्ड होना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है। जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा छह लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मध्यम वर्गीय परिवार को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस और दूसरी कटौतियों को भी बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग मानक कटौती मिलने की बात कही जा रही है।

साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी 50 लाख रुपये से ज्यादा आय पर सरचार्ज लगता है, लेकिन संयुक्त कराधान में इसकी सीमा 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे उच्च कर दायरे में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा। इससे कुल करयोग्य आय कम हो जाएगी और परिवार के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।

अमेरिका, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे कई देशों में शादीशुदा जोड़ों को संयुक्त कर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलती है। वहां परिवार को एक आर्थिक इकाई माना जाता है। भारत भी ऐसी प्रणाली अपनाकर अपने कर कानूनों को आसान और आधुनिक बना सकता है।

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