‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’ वाले बयान से बढ़ा सियासी घमासान, अब पश्चिम बंगाल में नई सरकार गठन पर क्या कहता है संविधान?

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने वाले बयान ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने दावा किया कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, बल्कि उन्हें हराया गया है। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

इधर बीजेपी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि नौ मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण कराया जाएगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो आगे संवैधानिक प्रक्रिया क्या होगी और बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी कैसे शपथ लेंगे।

ममता के बयान पर क्या बोलीं वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद

पूर्व सहायक सरकारी वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक राज्य का नेतृत्व करने वाले किसी नेता से ऐसा बयान स्वीकार करना बेहद मुश्किल है।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि संविधान में भले सीधे तौर पर ऐसी स्थिति का विस्तृत उल्लेख न हो, लेकिन संवैधानिक नैतिकता पूरी तरह स्पष्ट है। यदि कोई सरकार जनता का विश्वास खो देती है और मुख्यमंत्री स्वयं अपनी सीट हार जाती हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उस जनादेश का सम्मान करना जरूरी होता है।

पिंकी आनंद ने कहा कि यदि चुनाव परिणामों को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति है, तो उसके लिए संवैधानिक रास्ता चुनाव याचिका दायर करना होता है, न कि पद पर बने रहने का दावा करना।

क्या इस्तीफा न देने पर हो सकता है फ्लोर टेस्ट?

वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार यदि मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दे सकते हैं। फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित न होने की स्थिति में मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता जनता के विश्वास पर चलती है और यदि जनता अपना समर्थन वापस ले लेती है, तो उस स्थिति में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सरकार को हटना पड़ता है।

विधानसभा भंग होने के बाद क्या है स्थिति

पिंकी आनंद ने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति में विधानसभा सात मई को भंग हो चुकी है। ऐसे में आठ मई से सभी सदस्य तकनीकी रूप से अपनी सीटें खो चुके माने जाएंगे। इस स्थिति में नई विधानसभा और नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था जनता की इच्छा से चलती है और चुनाव परिणामों के बाद संवैधानिक मर्यादा का पालन जरूरी होता है।

बीजेपी ने किया शपथ ग्रहण का दावा

दूसरी ओर बीजेपी ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण नौ मई को होगा। पार्टी की ओर से शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया जा रहा है।

अब सभी की नजरें राज्यपाल की अगली संवैधानिक कार्रवाई और सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

 

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