नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर आयोजित 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की शक्ति, एकता और रणनीतिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा प्रदर्शित कर पिछले वर्ष आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई की याद दिलाई। मुख्य मंच पर पेश की गई ट्राई-सर्विसेज झांकी ने देश की सैन्य एकजुटता और ऑपरेशनल उत्कृष्टता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा।
ट्राई-सर्विसेज झांकी में दिखी एकजुट सैन्य शक्ति
झांकी की थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत’ रखी गई थी, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के साझा प्रयासों को दर्शाया गया। यह प्रस्तुति इस बात का प्रतीक रही कि कैसे तीनों सेनाएं समन्वय और तालमेल के साथ देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाती हैं।
इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर ने दिखाई रणनीतिक सफलता
झांकी में इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर को प्रमुखता से दिखाया गया, जिसने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में अहम भूमिका निभाई। मिशन के दौरान राष्ट्रीय और सैन्य नेतृत्व द्वारा की गई सटीक योजना और सेनाओं के बीच मजबूत समन्वय को इस प्रदर्शन के जरिए रेखांकित किया गया।
स्थानीय सहयोग और सैन्य तालमेल बना सफलता की कुंजी
रक्षा बलों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा कारण तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और स्थानीय नागरिकों का सहयोग रहा, जिसने ऑपरेशन को ज़मीनी स्तर पर मजबूती दी।
‘विरासत, विविधता और विकास’ का सशक्त संदेश
झांकी में ‘विरासत, विविधता और विकास’ के समन्वय को ऑपरेशन सिंदूर की विशिष्ट पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो आधुनिक तकनीक के साथ भारत की सैन्य परंपरा को दर्शाता है।
ब्रह्मोस, आकाश और S-400 ने दिखाया सुरक्षा कवच
प्रदर्शन में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक प्रहार करते दिखाया गया, जबकि आकाश मिसाइल सिस्टम और S-400 एयर डिफेंस नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत नागरिक सुरक्षा के मजबूत कवच को रेखांकित किया।
कॉम्बैट सपोर्ट में शक्तिबाण और दिव्यास्त्र की झलक
कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स सेगमेंट में शक्तिबाण के साथ दिव्यास्त्र को प्रदर्शित किया गया। हाई मोबिलिटी वाहनों पर तैनात ये प्लेटफॉर्म भारतीय सेना के स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में तेज़ी से बढ़ते कदम को दर्शाते हैं।
ड्रोन टेक्नोलॉजी से सटीक युद्ध की ओर कदम
शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड वाले ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड ड्रोन शामिल हैं, जो तोपखाने की फायरिंग की दिशा तय करने और लक्ष्य की सटीक पहचान में अहम भूमिका निभाते हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये सिस्टम ग्रुप ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हमलों और लोइटरिंग म्यूनिशन की तैनाती को संभव बनाते हैं।
ऑपरेशनल प्रोफेशनलिज्म का प्रदर्शन
शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा के पास थी, जबकि दिव्यास्त्र वाहन का नेतृत्व उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार ने किया। यह भारतीय सेना के जवानों की उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी और पेशेवर दक्षता को दर्शाता है।
मई 2025 में हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में लॉन्च किया गया था, जो 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। सैन्य कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना गया।