सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को लगाई फटकार, पूछा- बिना ट्रायल के कब तक किसी को जेल में रखोगे?

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नई दिल्‍ली (New Delhi) । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को काम करने के तरीके पर फटकार लगाई। मामला झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन (Former CM of Jharkhand Hemant Soren) के कथित सहयोगी प्रेम प्रकाश की याचिका से जु़ड़ा है। अवैध खनन से जुड़े मामले में ईडी (ED) ने उन्हें अगस्त 2022 में छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि आरोपी को बिना सुनवाई के जेल में रखने की जो परिपाटी अपनाई गई है, वह परेशान करने वाली है। वह इस मुद्दे पर विचार करेगी। ईडी पर बिना मुकदमा प्रेम प्रकाश को 18 महीने जेल में रखने का आरोप है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ कर रही थी। शीर्ष अदालत कहा कि ईडी द्वारा मामले में अनिश्चित काल तक जांच जारी रखने और आरोपी को बिना सुनवाई के जेल में रखने का जो कार्य किया गया वो ठीक नहीं है। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत आरोपी जमानत के अधिकार से वंचित रहा। उधर, ईडी ने मामले में मुकदमा इसलिए दायर नहीं किया क्योंकि वह मामले की जांच को पूरा कर रही थी। इसके लिए ईडी ने चार बार सप्लीमेंट चार्जशीट दायर की। इनमें से नवीनतम एक मार्च 2024 को दाखिल की गई थी।

ईडी का दावा है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कथित सहयोगी प्रेम प्रकाश को अगस्त, 2022 में छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। रांची में उनके घर से दो एके-47 राइफलें, 60 कारतूस और दो मैगजीन बरामद हुई थीं। उन पर धनशोधन व शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि चार सप्लीमेंट चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद मामले में जांच अभी जारी है।

पीठ ने कहा, “हम आपको (ईडी को) नोटिस दे रहे हैं। कानून के तहत मामले की जांच पूरी हुए बिना आप किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकते। मुकदमा शुरू हुए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यह कैद में रखने के समान है और एक व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। कुछ मामलों में हमें इस मुद्दे को सुलझाना होगा।”

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि याचिकाकर्ता 18 महीने से सलाखों के पीछे है और एक के बाद एक सप्लीमेंट चार्जशीट दाखिल किए जा रहे हैं, जिससे मुकदमे में देरी हो रही है। पीठ ने ईडी के अधिवक्ता से कई सवाल पूछे जिन्होंने सवालों का जवाब देने के लिए एक महीने का समय मांगा और कहा कि आरोपी एक प्रभावशाली व्यक्ति है और अगर उसे जमानत पर रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।

शीर्ष अदालत ने ईडी अधिवक्ता एसवी राजू को एक महीने के भीतर पीठ द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब देने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल के लिए तय की है।

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