उत्तर प्रदेश में घर बनाने या टाउनशिप विकसित करने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार जिला पंचायतों को सशक्त बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए नई मॉडल नियमावली लाने जा रही है। इसके तहत नक्शा पास कराने की प्रक्रिया महंगी हो जाएगी, साथ ही पंचायतों को विकास प्राधिकरणों की तरह कई अहम अधिकार भी दिए जाएंगे।
जिला पंचायतों को मिलेंगे विस्तृत अधिकार
नई नियमावली लागू होने के बाद जिला पंचायतों को टाउनशिप विकसित करने वाली संस्थाओं से विकास शुल्क और शमन शुल्क वसूलने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन पर संपत्ति को सील करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकेगी। यह कदम स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अनुज्ञा शुल्क और विकास शुल्क में बढ़ोतरी
शासन स्तर पर तैयार प्रस्ताव के मुताबिक, नक्शा पास कराने के लिए अनुज्ञा शुल्क में बढ़ोतरी की जाएगी। प्रदेश के 75 जिलों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए शुल्क दरें तय करने पर सहमति बनी है। इसके तहत 750 रुपये, 500 रुपये और 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर लागू की जा सकती है। साथ ही अनुज्ञा शुल्क 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
बिल्डरों की 20% जमीन होगी बंधक
नई व्यवस्था में बिल्डरों और डेवलपर्स पर भी सख्ती बढ़ेगी। प्रस्ताव के अनुसार, टाउनशिप या प्लाटिंग करने वालों की 20 प्रतिशत जमीन जिला पंचायत के पास बंधक रखी जाएगी। यह जमीन तभी मुक्त होगी जब परियोजना सभी तय नियमों और मानकों के अनुसार पूरी कर ली जाएगी। इसका उद्देश्य पर्यावरण और अन्य नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
सीएम योगी के निर्देश पर बनी हाईपावर कमेटी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में पंचायतों की आय बढ़ाने और उन्हें अधिक अधिकार देने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत एक हाईपावर कमेटी गठित की गई, जिसने इन सिफारिशों को तैयार किया है।
लखनऊ में पहले ही बढ़ चुका है शुल्क
इससे पहले मार्च 2026 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नक्शा पास कराने के शुल्क में करीब 3.58 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक के बाद नई दरें 1 अप्रैल से लागू हो चुकी हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण लागत सूचकांक में बढ़ोतरी के चलते शुल्कों में संशोधन किया गया है, ताकि विकास कार्यों के लिए जरूरी संसाधन जुटाए जा सकें। हालांकि, इस बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग और बिल्डरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
निर्माण लागत पर पड़ेगा सीधा असर
पहले से महंगी निर्माण सामग्री के बीच नक्शा पास कराने की लागत बढ़ने से आम लोगों के लिए घर बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, रियल एस्टेट सेक्टर में भी इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।