‘सीट नहीं, जीत मायने रखती है’… अखिलेश के 403 सीटों वाले बयान से यूपी की सियासत गरम, कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी

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लखनऊ: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अमेठी और रायबरेली दौरे के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को तैयार रखने वाला बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ संगठनात्मक तैयारी नहीं, बल्कि कांग्रेस को दिया गया बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

अखिलेश यादव ने जिस अंदाज में कहा कि “बात सीट की नहीं, जीत की है”, उससे साफ संकेत गया कि 2027 विधानसभा चुनाव में गठबंधन की रणनीति और शर्तें तय करने में समाजवादी पार्टी खुद को निर्णायक भूमिका में देख रही है।

कांग्रेस के लिए सियासी संकेत माना जा रहा बयान

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में कांग्रेस नेताओं की बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात की कोशिशों के बाद सपा प्रमुख का यह बयान आया है। ऐसे में इसे गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन दिखाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

बीते लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा और कांग्रेस ने मिलकर बीजेपी नीत एनडीए के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को अच्छा फायदा भी मिला और दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें 37 सीटें समाजवादी पार्टी और 6 सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं।

इसी सफलता के बाद माना जा रहा था कि 2027 विधानसभा चुनाव में भी दोनों दल साथ आ सकते हैं, लेकिन अब सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान के संकेत सामने आने लगे हैं।

‘403 सीटों पर कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार’

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं को पूरी तरह सक्रिय और तैयार कर दिया है, ताकि गठबंधन में शामिल कोई भी दल सपा की बूथ स्तर तक मजबूत संगठनात्मक ताकत का फायदा उठा सके।

उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से यह मानती रही है कि चुनाव में सीटों से ज्यादा जीत महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान कांग्रेस को यह एहसास कराने की कोशिश भी है कि यूपी में गठबंधन का बड़ा चेहरा और ज़मीनी ताकत समाजवादी पार्टी ही है।

कांग्रेस ने भी दिया जवाब

हालांकि कांग्रेस ने इस बयान को लेकर सार्वजनिक तौर पर किसी टकराव की स्थिति से इनकार किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि हर राजनीतिक दल का लक्ष्य सभी 403 सीटों पर अपना संगठन मजबूत करना होता है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई दल खुद मजबूत नहीं होगा तो वह अपने सहयोगी की मदद कैसे कर पाएगा। अजय राय ने अखिलेश के बयान को सकारात्मक बताया।

मायावती से मुलाकात की कोशिश के बाद बढ़ी चर्चा

दरअसल हाल ही में कांग्रेस एससी-एसटी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश कांग्रेस एससी-एसटी विभाग के अध्यक्ष एवं बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया मायावती से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि कांग्रेस ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया, लेकिन इसके बाद सियासी अटकलें तेज हो गई थीं।

अब अखिलेश यादव का बयान उसी घटनाक्रम की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

बिजली संकट को लेकर भी भाजपा पर हमला

इस बीच अखिलेश यादव ने प्रदेश में जारी बिजली संकट को लेकर बीजेपी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यूपी में चल रहे बिजली संकट के लिए कनिष्ठ कर्मचारियों और लाइनमैन को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा है और पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।

सपा प्रमुख ने बीजेपी सरकार, बिजली मंत्री, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में न नए पावर प्लांट लगाए गए, न ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था को मजबूत किया गया। साथ ही स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

 

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