ईरान में Starlink के इस्तेमाल पर सख्ती, 2 साल की जेल से मौत की सजा तक का प्रावधान; सेवा को बताया ‘युद्ध का हथियार’
नई दिल्ली: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि देश में स्टारलिंक का इस्तेमाल करने वालों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ईरान इस तकनीक को ‘युद्ध का हथियार’ मानता है और आरोप लगाता है कि इसका इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों, जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। इस बीच, स्टारलिंक की मदद से इंटरनेट प्रतिबंधों के बावजूद सूचनाएं साझा किए जाने को लेकर भी ईरानी सरकार की चिंता बनी हुई है।
स्टारलिंक टर्मिनल बंद करने के लिए कई सिस्टम होने का दावा
ईरान की सुप्रीम नेशनल साइबरस्पेस काउंसिल के सचिव मोहम्मद अमीन आघामिरी के मुताबिक, तेहरान के पास स्टारलिंक टर्मिनलों का संपर्क बाधित करने के कई सिस्टम मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से एक सिस्टम का इस्तेमाल जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान किया गया था।
आघामिरी ने यह भी कहा कि ईरान इस तकनीक को अपने सहयोगी देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। ईरान का आरोप है कि स्टारलिंक का इस्तेमाल उसके विरोधियों की ओर से सैन्य और खुफिया गतिविधियों में किया जा सकता है। हालांकि, ये ईरानी अधिकारियों के दावे हैं।
स्टारलिंक इस्तेमाल करने पर दो साल तक की जेल
ईरान में स्टारलिंक के इस्तेमाल पर दो साल तक की जेल का प्रावधान बताया गया है। वहीं, इसके टर्मिनलों का आयात करने या उन्हें वितरित करने पर पांच साल तक की सजा हो सकती है। जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों में मौत की सजा तक का प्रावधान बताया गया है।
ईरान पहले भी स्टारलिंक की सेवाओं को बाधित करने के लिए जैमर, जीपीएस सिग्नल में हस्तक्षेप और छापेमारी जैसे उपाय अपना चुका है। इन कदमों के बावजूद स्टारलिंक के जरिए कुछ प्रदर्शनकारी इंटरनेट बंद होने की स्थिति में भी वीडियो और दूसरी जानकारियां साझा कर सके हैं।
इंटरनेट बंद होने के बावजूद सूचना साझा करना ईरान के लिए चुनौती
स्टारलिंक सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है। इसकी मदद से उन इलाकों में भी ऑनलाइन पहुंच संभव हो सकती है, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवाएं बंद या बाधित हों। ईरान में सरकार की ओर से इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए जाने के दौरान इस तकनीक के इस्तेमाल की खबरें सामने आती रही हैं।
ईरानी सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़ा मुद्दा मानती है। वहीं, इंटरनेट प्रतिबंधों के बीच इसका इस्तेमाल करने वाले लोग इसके जरिए सूचनाएं साझा कर सकते हैं। इसी वजह से स्टारलिंक को लेकर ईरान का रुख लगातार सख्त बना हुआ है।
यूक्रेन में स्टारलिंक को लेकर भी छिड़ी चर्चा
स्टारलिंक को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा उस समय और तेज हुई, जब यूक्रेन में इसके इस्तेमाल और कुछ टर्मिनलों पर गति संबंधी पाबंदियों की खबरें सामने आईं। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन अभियानों में इस्तेमाल होने वाले कुछ स्टारलिंक टर्मिनलों की गति सीमित किए जाने से सैन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे ड्रोन की उड़ान और उनकी प्रभावशीलता पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने युद्ध के बीच सैन्य सहायता और खुफिया सहयोग को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, स्टारलिंक पर लगी पाबंदियों और अमेरिका-रूस के बीच किसी कथित तेल समझौते के बीच सीधा संबंध होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच स्टारलिंक पर बढ़ता विवाद
स्टारलिंक की भूमिका अब केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रह गई है। ईरान में इसके इस्तेमाल पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और यूक्रेन में सैन्य अभियानों से जुड़े विवाद ने इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर इसका इस्तेमाल इंटरनेट प्रतिबंधों के बावजूद संचार के लिए किया जा रहा है, तो दूसरी ओर कुछ सरकारें इसे सुरक्षा के लिए चुनौती मानती हैं।