कमीशनखोरी के आरोपों में बड़ी कार्रवाई, सहायक निदेशक और प्रधान सहायक सस्पेंड; योगी सरकार का सख्त एक्शन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार और प्रधान सहायक इमरान अहमद को निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, पद के दुरुपयोग और कार्य प्रणाली में गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं।
सहायक निदेशक पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने जनपदीय बजट के कार्यों में 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की। इसके साथ ही उन पर वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितता, कार्यप्रणाली में मनमानी और सहकर्मियों को धमकाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। बताया गया है कि वर्ष 2024-25 में आहरण-वितरण अधिकारी रहते हुए बजट के उपयोग में कई खामियां सामने आईं, जिसके चलते बड़ी धनराशि विभाग को वापस करनी पड़ी।
प्रधान सहायक पर गिरोहबंदी और उत्पीड़न के आरोप
वहीं प्रधान सहायक इमरान अहमद पर पद के दुरुपयोग, कर्मचारियों के उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और धार्मिक भेदभाव जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ गिरोहबंदी कर कार्य करने की शिकायतें भी सामने आई थीं। इन सभी आरोपों को गंभीर मानते हुए विभागीय स्तर पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
जांच के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई
प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता डॉ. हरिओम द्वारा सहायक निदेशक के निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं। मामले की अनुशासनिक जांच के लिए संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण मयंक गंगवार को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच पूरी होने तक सहायक निदेशक को देवीपाटन मंडल के संयुक्त निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
प्रधान सहायक इमरान अहमद के खिलाफ कार्रवाई निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह के आदेश पर की गई है। यह कार्रवाई विधान परिषद सदस्य की ओर से भेजे गए पत्र और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए की गई।
प्रशासन का सख्त संदेश
सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और विभागीय अनुशासन के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।