बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में बड़ा खुलासा, आरोपों के घेरे में कर्मचारी को मिला प्रमोशन, नोट गिनने की भी सौंपी गई जिम्मेदारी

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नई दिल्ली: उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में जांच के दौरान नया खुलासा सामने आया है। आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी को मंदिर समिति में लगातार अहम जिम्मेदारियां दी जाती रहीं। इतना ही नहीं, उन्हें पदोन्नति देकर चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

2014 में हुई नियुक्ति, बाद में नियम बदलकर मिला प्रमोशन

मिली जानकारी के अनुसार संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर हुई थी। यह ऐसा पद था, जिसमें पदोन्नति का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। बाद में नियमों में संशोधन कर उन्हें जनसंपर्क विशेष अधिकारी के पद तक पदोन्नति का मार्ग भी उपलब्ध कराया गया। इसी दौरान उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।

जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार, आगे की कार्रवाई उसी पर निर्भर

मामले की जांच के लिए गठित समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। हालांकि समिति के सभी सदस्य अब तक बदरीनाथ नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही जा रही है।

मंदिर समिति अध्यक्ष बोले- जरूरत पड़ी तो होगी स्वतंत्र जांच

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच भी कराई जा सकती है। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारी समिति का स्थायी कर्मचारी है और विभिन्न अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। शिकायत प्राप्त होने के दिन ही जांच समिति का गठन कर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन पुराने कैमरों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। यात्रा सीजन के दौरान कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं।

संपत्ति की जांच के भी संकेत, रोज बैंक में जमा होती है चढ़ावे की राशि

मंदिर समिति ने संकेत दिए हैं कि संदेह के दायरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच कराई जाएगी। समिति का कहना है कि चढ़ावे की राशि प्रतिदिन बैंक में जमा कराई जाती है और उसकी गणना बैंक प्रतिनिधि, गणना अधिकारी तथा तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में होती है। अब तक उपलब्ध रिकॉर्ड में किसी प्रकार की ओवरराइटिंग सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों से जुड़े लोगों पर आरोप हैं, उन्हें ही जांच प्रक्रिया में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति या उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल किया जा सकता है। अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

 

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