मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 77वें गणतंत्र दिवस पर प्रदेश के सभी लोगों से किया ‘राष्ट्र प्रथम’ का आह्वान
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर सोमवार को अपने सरकारी आवास पर झंडा फहराने के साथ ही प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्र के सभी नायकों को याद कर उनके योगदान को नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1950 में आज ही के दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 76 वर्ष की इस यात्रा में संविधान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक प्रत्येक भारतवासी के गौरव, भारत की एकात्मता और अखंडता के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हम सब नए भारत का दर्शन कर रहे हैं तो इसमें संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ जोड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन ने नई ऊंचाइयां प्राप्त कीं। भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, वर्तमान भारत के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, क्रांतिकारियों के सिरमौर नेताजी सुभाष चंद्र बोस समेत देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले भारत के महान सपूतों को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम योगी ने उनकी स्मृतियों को नमन किया।
संकल्पों को बढ़ाने में मददगार होगा ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद को न्याय, संविधान व व्यवस्था से ऊपर मानता है तो वह भारत के संविधान की अवमानना करता है। कोई व्यक्ति यह कहेगा कि मैं जो कहूंगा, वही सही है, यह नहीं चल सकता। आज का दिन भारत के संविधान के प्रति समर्पण भाव के साथ बढ़ने और उन संकल्पों को आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा का दिवस है। सभी प्रदेशवासी भारत के संविधान को सम्मान देते हैं। सीएम योगी ने राष्ट्रनायकों के ध्येय ‘राष्ट्र प्रथम’ का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रथम भाव का दस्तावेज संविधान के रूप में हमारे सामने है। यह देश के संकल्पों को आगे बढ़ाने में मददगार होगा
संविधान के प्रति श्रद्धा व समर्पण का भाव
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संविधान की मूल भावनाओं का अनादर करते हैं, तो भारत मां के उन महान सपूतों का भी अनादर करते हैं, जिनके दम पर देश स्वतंत्र हुआ। हर नागरिक का यह दायित्व है कि संविधान के प्रति श्रद्धा व समर्पण भाव रखे। हमारे लिए यह पवित्र दस्तावेज है, जो हर विपरीत परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शक होगा। भारत को एकता व अखंडता के सूत्र में बांधने के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक तक न्याय, बंधुता व समता के एक भाव को लागू करने के अभियान को भी बढ़ाने का काम जारी रखना होगा।
संविधान के तीन शब्दों का भी जिक्र
उन्होंने कहा कि न्याय, समता व बंधुता, संविधान के तीन शब्द हैं। हर नागरिक को बिना भेदभाव न्याय मिले। जाति, मत-मजहब, भाषा व क्षेत्र के आधार पर भेदभाव न हो। परस्पर समता व बंधुता का माहौल आगे बढ़ेगा तो भारत को विकसित बनाने के पीएम मोदी के अभियान को कोई नहीं रोक सकता। विकसित भारत की संकल्पना हर भारतवासी के लिए गौरव का क्षण होना चाहिए। क्योंकि, यह सिर्फ देश की आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि हर नागरिक की खुशहाली और उसकी कई गुना समृद्धि का दिन होगा। लेकिन, इसका रास्ता समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्तियों से प्रारंभ होता है और यह यात्रा उन नागरिकों के माध्यम से बढ़नी चाहिए। इससे हर स्तर पर आत्मनिर्भरता के भाव से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है।
तीन शब्दों में बड़ी ताकत
सीएम योगी आदित्यनाथ कहा कि तीन शब्दों ने भारत के संविधान को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि इन तीन शब्दों ने भारत के संविधान को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित करने में सबसे बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है। आजादी के पूर्व देश को सामाजिक रूप से तोड़ने के लिए अनेक दुष्चक्र प्रारंभ हुए थे। देश को विभाजित करने के लिए भाषाई, क्षेत्र व जाति के आधार पर अनेक षडयंत्र रचे गए थे, लेकिन ये षडयंत्र अधिक दिन तक टिक नहीं पाए। जब भी संविधान के मूल भाव को कमजोर करने की साजिश होती है तो कहीं न कहीं से एक सुगबुगाहट भी शुरू हो जाती है। यह उन भावों को कमजोर करती है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हों। भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ जोड़ने की नई प्रेरणा देता है।
देश का संबल बना संविधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा के निर्माण के उपरांत 26 नवंबर 1949 को भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया। आज पूरा देश 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में आयोजित करता है। हर भारतवासी का दायित्व बनता है कि हम अपने संविधान के प्रति श्रद्धा व समर्पण भाव से कार्य करें, क्योंकि सम-विषम परिस्थितियों में यह देश का संबल बना है। संविधान की पंक्ति “हम भारत के लोग” हर भारतवासी के लिए प्रेरणा है। भारत के संविधान का असली संरक्षक कोई है, तो यहां का नागरिक है। भारत के नागरिकों के प्रति हर संस्था, मंत्रालयों व विभागों को अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। यह संविधान के प्रति हमारे समर्पण के भाव को व्यक्त करता है।