ग्लोबल डिप्लोमेसी में नया मोड़ आया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया अटैक के बाद गल्फ के कुछ सहयोगी देशों में नाराजगी देखने को मिली है। अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले से पहले इन देशों को पूरी जानकारी नहीं दी और जवाबी कार्रवाई का सामना करने के लिए पर्याप्त तैयारी या मदद भी उपलब्ध नहीं कराई।
ईरान पर अटैक से पहले जानकारी नहीं मिलने पर नाराज खाड़ी देश
दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने बताया कि उनकी सरकारें अमेरिका के रवैये से निराश हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ऑपरेशन शुरू करने से पहले उन्हें शामिल नहीं किया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई। अधिकारियों ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिका ने इस ऑपरेशन को मुख्य रूप से इजरायल और अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर अंजाम दिया, जबकि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अकेला छोड़ दिया गया।
अमेरिका ने चेतावनी को किया नजरअंदाज
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि इस जंग के परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने इस वॉर्निंग को नजरअंदाज किया। खाड़ी देशों में यह धारणा बनी है कि अमेरिकी रणनीति उनके हितों की बजाय इजरायल के सुरक्षा फोकस पर आधारित रही।
ईरान के मिसाइल हमले में कमी का दावा
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि ईरान के जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले अब 90 फीसदी तक कम हो गए हैं। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरानी मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर्स को नष्ट किया गया और उनकी हथियार बनाने की क्षमता भी कम हुई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप सभी क्षेत्रीय साझेदारों से संपर्क में हैं और ईरानी हमले इस खतरे को खत्म करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया गुप्त
खाड़ी के अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर जानकारी साझा की है। हालांकि, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब की सरकारों ने अभी तक इस मसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।