ईरान की ‘डमी वॉर’ रणनीति? हेलीकॉप्टर की पेंटिंग और गुब्बारे वाले टैंक से क्या इजरायल को दे रहा चकमा

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई चर्चा सामने आई है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ईरान दुश्मन को भ्रमित करने के लिए नकली सैन्य उपकरणों और जमीन पर बनी पेंटिंग्स का इस्तेमाल कर रहा है। आरोप है कि इस रणनीति की वजह से इजरायल और उसके सहयोगी महंगी मिसाइलें ऐसे लक्ष्यों पर दाग रहे हैं, जो असली नहीं बल्कि सिर्फ भ्रम पैदा करने के लिए बनाए गए हैं।

वीडियो से शुरू हुई बहस

हाल ही में Israel Defense Forces ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उसने ईरान के एक सैन्य विमान को नष्ट कर दिया है। लेकिन वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस दावे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

कुछ यूजर्स का कहना है कि वीडियो में दिख रहा लक्ष्य असली हेलीकॉप्टर या विमान नहीं बल्कि जमीन पर बनी पेंटिंग जैसा प्रतीत होता है। उनका तर्क है कि अगर हमला किसी वास्तविक हेलीकॉप्टर पर हुआ होता तो विस्फोट के बाद उसके रोटर या ढांचे में भारी क्षति दिखती, जबकि वीडियो में ऐसा कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई देता।

लाखों डॉलर की मिसाइल, कुछ डॉलर की पेंटिंग?

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि एक इजरायली मिसाइल की औसत कीमत लगभग 3 मिलियन डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) होती है, जबकि जमीन पर बनाए गए ऐसे नकली लक्ष्य तैयार करने में बेहद कम खर्च आता है।

इन पेंटिंग्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ऊपर से देखने पर ऑप्टिकल इल्यूजन के कारण वे असली सैन्य उपकरण जैसे दिखाई दें। इसी वजह से यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं ईरान की इस रणनीति में फंसकर इजरायल अपनी महंगी मिसाइलें तो बर्बाद नहीं कर रहा।

गुब्बारे वाले टैंक और नकली लॉन्चर का भी दावा

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि ईरान दुश्मन को भ्रमित करने के लिए लकड़ी, रबर और अन्य हल्की सामग्री से बने डमी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने चीन से बड़ी संख्या में गुब्बारे जैसे फुलाए जाने वाले टैंक, मिसाइल कैरियर और लॉन्चर मंगवाए हैं, ताकि दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को भ्रमित किया जा सके। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

युद्ध में ‘डिकॉय’ तकनीक कोई नई नहीं

विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध में नकली हथियार या डिकॉय (Decoy) का इस्तेमाल कोई नई रणनीति नहीं है। कई दशकों से सेनाएं दुश्मन को गुमराह करने के लिए नकली टैंक, विमान और मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करती रही हैं।

हालांकि कुछ सैन्य विशेषज्ञ इन दावों पर संदेह भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि आधुनिक हमले अक्सर थर्मल सिग्नेचर, रडार डेटा और कई तकनीकी संकेतों के आधार पर किए जाते हैं। ऐसे में केवल पेंटिंग या साधारण नकली मॉडल से पूरी तरह भ्रम पैदा करना आसान नहीं होता।

इस वजह से फिलहाल यह साफ नहीं है कि वायरल हो रहे दावों में कितनी सच्चाई है और कितना सोशल मीडिया का अतिशयोक्तिपूर्ण प्रचार। लेकिन इतना तय है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक और भ्रम पैदा करने वाली रणनीतियां भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

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