पंजाब विधानसभा में LPG और पेट्रोल-डीजल संकट पर हंगामा, AAP सरकार ने केंद्र के खिलाफ पेश किया निंदा प्रस्ताव
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में गुरुवार को एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल की संभावित कमी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटरूचक्क ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण पैदा हुई स्थिति और केंद्र की विदेश नीति के चलते देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर संकट की आशंका बढ़ गई है।
पंजाब विधानसभा में दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार के खिलाफ यह दूसरा निंदा प्रस्ताव है। इससे पहले मंगलवार को भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड समझौते के विरोध में भी विधानसभा में निंदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
विदेश नीति को बताया जिम्मेदार
निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री लाल चंद कटरूचक्क ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत विदेश नीति के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब में जल्द ही गेहूं की खरीद का सीजन शुरू होने वाला है और पेट्रोल-डीजल की कमी का असर इस पूरी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि राज्य के गोदाम पहले से भरे हुए हैं और ढुलाई में दिक्कतें आ रही हैं। अगर समय पर परिवहन नहीं हुआ तो नई फसल को रखने में भी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
गैस की कमी से उर्वरक उत्पादन पर असर का दावा
कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने भी विधानसभा में कहा कि गैस की कमी के कारण नंगल और बठिंडा में स्थित सीएफएल के प्लांट बंद हो गए हैं। इससे यूरिया की कमी होने की आशंका बढ़ सकती है, जिसका असर किसानों पर पड़ेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि पानीपत यूनिट को गैस की पूरी सप्लाई दी जा रही है, जबकि पंजाब के प्लांटों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही है।
महंगे सिलेंडर और सप्लाई पर भी उठाए सवाल
हरजोत बैंस ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और कॉमर्शियल सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि कई मेट्रो शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि पहले कहा गया था कि किसी तरह की समस्या नहीं होगी। बैंस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को विफल बताते हुए कहा कि यदि एलपीजी और एलएनजी का संकट बढ़ता है तो इसका असर आम लोगों से लेकर किसानों तक पड़ेगा।
वित्त मंत्री ने भी उठाए सवाल, बहस की मांग
वहीं, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को लेकर वित्त मंत्री हरपाल चीमा शुरुआत में अनभिज्ञ नजर आए। हालांकि उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि देश की विदेश नीति पूरी तरह विफल हो चुकी है और केंद्र सरकार देश और जनता के हितों की रक्षा करने में असफल रही है।
चीमा ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चला रहे हैं या डोनाल्ड ट्रंप। उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान युद्धविराम की जानकारी ट्रंप द्वारा इंटरनेट मीडिया पर साझा किए जाने का भी जिक्र किया। वित्त मंत्री ने इस मुद्दे पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया।
यदि गुरुवार को यह निंदा प्रस्ताव पारित हो जाता है तो संभवत: तीन दिनों के भीतर केंद्र सरकार के खिलाफ विधानसभा में दो निंदा प्रस्ताव पास होने का यह पहला मौका होगा।