ग्रेटर नोएडा की चेरी काउंटी सोसाइटी में मीटर रिचार्ज घोटाले का आरोप, अकाउंट एग्जीक्यूटिव पर गबन का मामला दर्ज
फ्लैट मालिकों से ली गई बिजली मीटर रिचार्ज राशि में हेराफेरी का आरोप, बिसरख थाना पुलिस ने शुरू की जांच
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा की एक प्रतिष्ठित हाउसिंग सोसाइटी में बिजली मीटर रिचार्ज को लेकर कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। चेरी काउंटी सोसाइटी में मेंटेनेंस विभाग से जुड़े एक कर्मचारी पर फ्लैट मालिकों से ली गई रिचार्ज राशि में हेराफेरी कर धनराशि गबन करने का आरोप लगा है। इस मामले में कंपनी की शिकायत पर थाना बिसरख में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
गोपनीय शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
बताया जा रहा है कि चेरी काउंटी सोसाइटी का मेंटेनेंस कार्य ओसीएस ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मे है। कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक मयंक किरोला की ओर से पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया कि सोसाइटी के मेंटेनेंस कार्यालय में वर्ष 2016 में मुजफ्फरनगर निवासी रणदीप सिंह को अकाउंट एग्जीक्यूटिव के रूप में नियुक्त किया गया था।
पिछले कुछ समय से कंपनी को लगातार ऐसी गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं कि बिजली मीटर रिचार्ज के दौरान ली जाने वाली रकम और कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच अंतर पाया जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कंपनी ने आंतरिक स्तर पर विस्तृत जांच शुरू की।
रिकॉर्ड जांच में सामने आई गड़बड़ी
जांच के दौरान वर्ष 2016 से अब तक के बिजली मीटर रिचार्ज रजिस्टर, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और फ्लैट मालिकों के रिचार्ज रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में कई ऐसी विसंगतियां सामने आईं, जिससे कथित गड़बड़ी की पुष्टि होने लगी।
आरोप है कि जब फ्लैट मालिक अपने बिजली मीटर का रिचार्ज करवाते थे, तो उनके मोबाइल फोन पर पूरी राशि का रिचार्ज दिखाया जाता था। लेकिन कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में उससे कम रकम दर्ज की जाती थी। इस तरीके से कथित रूप से शेष राशि को हड़प लिया जाता था।
2019 से 2025 के बीच की गड़बड़ी
कंपनी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह कथित हेराफेरी वर्ष 2019 से 2025 के बीच होती रही। अब तक करीब 14 हजार रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, हालांकि कंपनी को आशंका है कि वास्तविक रकम इससे अधिक भी हो सकती है। इसलिए पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।