चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू: डोली पर आगमन और हाथी पर विदाई, जानिए क्या कहते हैं ज्योतिषीय संकेत

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हाजीपुर: इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च, गुरुवार से हो रहा है। इस बार नवरात्रि खास मानी जा रही है, क्योंकि देवी दुर्गा का आगमन डोली पर और विदाई हाथी पर होने का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष संकेतों से जोड़कर देखा जाता है।

डोली पर आगमन को क्यों माना जाता है अशुभ संकेत

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, देवी का डोली पर आगमन स्थिरता के लिहाज से शुभ नहीं माना जाता। इसे सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि इससे देश और दुनिया में राजनीतिक हलचल, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ सकती है। विद्वानों के अनुसार, डोली मानव द्वारा संचालित वाहन है, जो अस्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

हाथी पर विदाई का क्या है महत्व

वहीं, देवी दुर्गा की विदाई हाथी पर होना अत्यंत शुभ संकेत माना गया है। ज्योतिष के अनुसार, यह आने वाले समय में सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। इसे देश में खुशहाली और स्थिरता के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।

नवरात्रि में श्रद्धालुओं की उमड़ेगी भीड़

नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं। इन नौ दिनों में भक्त सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और धार्मिक नियमों का पालन करते हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। इस बार 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसके अलावा दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी स्थापना की जा सकती है।

नौ दिनों की पूजा का क्रम

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसके बाद क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और अंत में मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में आती है। इस दौरान उपवास, सात्विक भोजन, अखंड ज्योति और संयमित जीवन को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

 

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