नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के नए लक्ष्यों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत देश ने वर्ष 2035 तक 400 करोड़ टन का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
कैबिनेट बैठक में नए लक्ष्यों को मंजूरी
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इन नए लक्ष्यों को स्वीकृति दी गई। सरकार ने इस दौरान पहले तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति की भी सराहना की और इसे सकारात्मक कदम बताया।
उत्सर्जन में कटौती और स्वच्छ ऊर्जा पर जोर
सरकार ने 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर की तुलना में 47 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही यह भी संकल्प लिया गया है कि देश की कुल ऊर्जा मांग का 60 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से पूरा किया जाएगा। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ढांचे के तहत तय किए गए लक्ष्य
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि ये लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन ढांचे के तहत तय किए गए हैं। ये लक्ष्य वर्ष 2031 से 2035 की अवधि के लिए निर्धारित किए गए हैं।
विकसित भारत और नेट जीरो की दिशा में पहल
सरकार का कहना है कि ये नई प्रतिबद्धताएं देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी।