लखनऊ: ईरान में युद्ध से पैदा हुए एलपीजी संकट ने केंद्र सरकार को सतर्क कर दिया है। इसके बाद सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के व्यापक नेटवर्क के निर्माण पर तेजी से काम कर रही है। छोटे शहरों से लेकर मेट्रो शहरों तक पीएनजी की पहुंच बढ़ाने के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिवों की संयुक्त अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई।
तीन सप्ताह में एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश
बैठक में लखनऊ और वाराणसी सहित देशभर के 110 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क विस्तार के लिए तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मिशन मोड में कार्य कर नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जाए। इसमें राज्यों के शहरी विकास सचिव, जिलाधिकारी और नगर निकायों के अधिकारी शामिल थे।
देशभर में एलपीजी संकट गंभीर
ईरान में तनाव के चलते एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लखनऊ सहित कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं। यूपी में प्रतिदिन 11 लाख सिलिंडरों की मांग के मुकाबले केवल सात-साढ़े लाख की आपूर्ति हो पा रही है। देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की स्थिति है।
पीएनजी कनेक्शन का लक्ष्य और संभावित विस्तार
अगले चरण में 30 लाख नए कनेक्शन दिए जाने की योजना है। कुल मिलाकर 60 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। लखनऊ, वाराणसी, अहमदाबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और सूरत में शत प्रतिशत नेटवर्क का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लखनऊ में वर्तमान स्थिति
लखनऊ में 2011 में पीएनजी की आपूर्ति शुरू हुई थी, लेकिन अब तक आधे शहर में ही पाइपलाइन बिछी है। वर्तमान में शहर में तीन हजार किलोमीटर नेटवर्क है, जिसमें केवल 80 हजार कनेक्शन सक्रिय हैं। लखनऊ में कुल एक लाख कनेक्शन की संभावना है, जिसे केंद्र सरकार अब तेजी से लागू करने जा रही है।
वार्ड-स्तर पर कार्ययोजना और निगरानी
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों और नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि वार्ड-स्तर पर लक्ष्य तय करें और कार्ययोजना बनाएं। इसमें ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और बड़े संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रगति की निगरानी के लिए एमआईएस पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिस पर प्रतिदिन रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य होगा।