तमिलनाडु में ‘अन्नामलाई फैक्टर’ से बदली सियासी तस्वीर, बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ी, मजबूत मानी जा रही जमीन भी खिसकने के संकेत

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भले ही सीमित उम्मीदों के साथ मैदान में उतरी हो, लेकिन पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा जरूर की जा रही थी। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। हालांकि, इस बीच ‘अन्नामलाई फैक्टर’ पार्टी के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है, जिससे खासतौर पर कोयंबटूर जैसे मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

कोयंबटूर में बदला माहौल, कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित
कोयंबटूर को बीजेपी का पारंपरिक रूप से मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, जहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई की सक्रियता और मेहनत का असर साफ दिखता था। लेकिन इस बार उनके चुनावी मैदान से बाहर रहने के चलते माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं, वहीं बीजेपी को समर्थन देने का मन बना चुके मतदाता भी अब विकल्प तलाशते दिख रहे हैं। ऐसे मतदाताओं के लिए डीएमके विकल्प नहीं है, लिहाजा वे अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की ओर रुख कर सकते हैं।

गठबंधन की शर्त और नेतृत्व में बदलाव
पार्टी सूत्रों के अनुसार, एआईएडीएमके ने बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए स्पष्ट शर्त रखी थी कि के. अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाए। इसके बाद ही गठबंधन पर सहमति बनी। बीजेपी ने उनकी जगह एन. नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। अन्नामलाई का आक्रामक राजनीतिक रुख अक्सर डीएमके के साथ-साथ एआईएडीएमके पर भी निशाना साधता था, जो गठबंधन की राह में बाधा बन रहा था।

टिकट से दूरी पर अन्नामलाई की सफाई
अन्नामलाई को न तो 2025 में राज्यसभा भेजा गया और न ही विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया गया। इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह उनका स्वयं का निर्णय था और उन्होंने पार्टी से टिकट पर विचार न करने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि वे चुनाव लड़ने के बजाय एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करेंगे। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

नेतृत्व की असहजता या रणनीतिक फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का आक्रामक रुख पार्टी नेतृत्व को असहज कर रहा था। यही कारण है कि उन्हें धीरे-धीरे साइडलाइन किया गया। साथ ही, एआईएडीएमके को साथ बनाए रखने के लिए भी यह कदम जरूरी माना गया। लेकिन इस फैसले का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।

बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती, अन्य क्षेत्रों में भी असर संभव
कोयंबटूर में बदले हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अन्नामलाई की गैरमौजूदगी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। यही स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों में भी बन सकती है, जहां उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी। ऐसे में बीजेपी के सामने चुनावी रणनीति को लेकर नई चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं।

 

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