मिडिल ईस्ट में बदला समीकरण: UAE की अमेरिका से बड़ी मांग, कहा—युद्ध का खर्च उठाए वाशिंगटन, नहीं तो डॉलर छोड़ युआन की राह पर जा सकते हैं खाड़ी देश

0 28

अबू धाबी से सामने आई एक अहम रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों में हलचल पैदा कर दी है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने वाशिंगटन के सामने बड़ी मांग रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने साफ संकेत दिया है कि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका करे, अन्यथा क्षेत्रीय देश डॉलर पर निर्भरता कम कर चीनी मुद्रा युआन की ओर रुख कर सकते हैं।

युद्ध का खर्च अमेरिका उठाए, खाड़ी देशों की बढ़ी नाराजगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए युद्ध से हुए नुकसान के लिए वित्तीय गारंटी मांगी है। खाड़ी देशों का तर्क है कि इस संघर्ष में उनकी ऊर्जा और नागरिक संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है, ऐसे में इसकी भरपाई भी अमेरिका को ही करनी चाहिए। माना जा रहा है कि अगर यह मांग आगे बढ़ती है तो अन्य खाड़ी देश भी मुआवजे की कतार में शामिल हो सकते हैं।

युद्ध बना महंगा सौदा, अरबों डॉलर का नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका रोजाना भारी रकम खर्च कर रहा है। वहीं इजरायल का भी खर्च अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है। युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की लागत और भी ज्यादा बताई जा रही है। सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों में ऊर्जा ढांचे और नागरिक सुविधाओं की मरम्मत पर 60 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च का अनुमान है, जिसमें तेल और गैस सेक्टर को ही बहाल करने के लिए करीब 50 बिलियन डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। इस नुकसान में यूएई सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में गिना जा रहा है।

दुबई और ऊर्जा ठिकानों को बड़ा नुकसान
ईरानी हमलों के चलते दुबई के कई प्रमुख ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। नागरिक इमारतों के साथ-साथ ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी असर पड़ा है। फुजैरा का तेल निर्यात टर्मिनल और बड़े डेटा सेंटर भी हमलों की चपेट में आए, जिससे बैंकिंग और क्लाउड सेवाओं पर असर पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में यूएई ने अमेरिका से आर्थिक सुरक्षा की मांग तेज कर दी है।

करेंसी स्वैप और डॉलर संकट की आशंका
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि यूएई के केंद्रीय बैंक प्रमुख ने अमेरिकी अधिकारियों से करेंसी स्वैप व्यवस्था पर चर्चा की है, ताकि डॉलर की उपलब्धता बनी रहे। खाड़ी देशों की चिंता यह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और तेल निर्यात में बाधा से डॉलर राजस्व में भारी गिरावट आ सकती है।

ट्रंप प्रशासन पर बढ़ा दबाव, पुरानी परंपरा उलटने की तैयारी
यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिका खुद युद्ध की लागत को लेकर दबाव में है। पहले जहां 1991 के खाड़ी युद्ध में सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिका को आर्थिक सहयोग दिया था, वहीं अब यूएई ने उलट रुख अपनाते हुए अमेरिका से ही खर्च उठाने को कहा है। इससे वाशिंगटन के लिए स्थिति और जटिल हो सकती है।

युआन की ओर झुकाव, डॉलर के लिए चेतावनी
यूएई ने संकेत दिया है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है और डॉलर की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो वह तेल कारोबार और अन्य लेन-देन में चीनी युआन या अन्य मुद्राओं का इस्तेमाल शुरू कर सकता है। इसे अमेरिकी डॉलर के वैश्विक वर्चस्व के लिए एक बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान ने भी मांगा मुआवजा, क्षेत्र में अनिश्चितता बरकरार
दूसरी ओर ईरान ने भी खाड़ी देशों और अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए भारी मुआवजे की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और विफल होती शांति वार्ताओं के बीच 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा युद्धविराम भी अनिश्चितता में घिरा है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में हालात कब सामान्य होंगे, इस पर अभी संशय बना हुआ है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.