यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का बड़ा खुलासा: सऊदी, कतर और UAE के साथ ड्रोन सुरक्षा समझौते; सस्ते इंटरसेप्टर तकनीक पर फोकस

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कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में खाड़ी देशों के साथ हुए सुरक्षा और ड्रोन से जुड़े अहम समझौतों की जानकारी साझा की है। CNN को दिए बयान में जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ ड्रोन तकनीक और सुरक्षा सहयोग को लेकर डील की है, जिसका उद्देश्य कम लागत वाली रक्षा प्रणाली विकसित करना है।

ड्रोन डील का उद्देश्य—कम लागत में सुरक्षा समाधान

जेलेंस्की ने कहा कि इस समझौते का मुख्य फोकस सस्ते ड्रोन और ड्रोन इंटरसेप्टर तैयार करना है, ताकि खाड़ी देश अपनी हवाई सुरक्षा को अधिक प्रभावी बना सकें। उन्होंने बताया कि ईरानी डिजाइन के शाहेद ड्रोन जैसे हथियारों की लागत 80 से 130 हजार डॉलर तक हो सकती है, जबकि उन्हें नष्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइलें कई मिलियन डॉलर की होती हैं। ऐसे में 10 हजार डॉलर की इंटरसेप्टर तकनीक एक किफायती विकल्प साबित हो सकती है।

खाड़ी देशों की सुरक्षा में सहयोग का लक्ष्य

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूक्रेन का उद्देश्य खाड़ी देशों को उनकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद करना है। उन्होंने संकेत दिया कि यह सहयोग केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करेगा।

ऊर्जा और आर्थिक सहयोग पर भी बातचीत

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि ड्रोन तकनीक के बदले में यूक्रेन को ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े संसाधन, जैसे तेल और डीजल की आपूर्ति और कुछ मामलों में आर्थिक सहायता भी मिल सकती है। हालांकि, इस पूरी डील के अंतिम विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

सऊदी एयरबेस पर यूक्रेनी तकनीक की तैनाती

सूत्रों के अनुसार, हाल के हफ्तों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर यूक्रेन की काउंटर-ड्रोन तकनीक भी तैनात की गई है। इसका उद्देश्य ड्रोन हमलों से होने वाले नुकसान को रोकना है। इस दौरान ‘स्काई मैप’ नामक कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को भी स्थापित किया गया है, जिसका उपयोग रूस-यूक्रेन युद्ध में पहले सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

यूक्रेनी विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेनी सेना के विशेषज्ञों ने हाल ही में सऊदी एयरबेस पर मौजूद सैनिकों को इस तकनीक के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी है, ताकि ड्रोन हमलों का बेहतर तरीके से मुकाबला किया जा सके।

 

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