AAP में बड़ा सियासी भूचाल: राघव चड्ढा समेत तीन राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, भाजपा में शामिल होने का ऐलान
चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करते हुए भाजपा में विलय का निर्णय ले चुके हैं।
‘पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई’
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के पीछे के कारणों को विस्तार से बताते हुए कहा कि जिस आम आदमी पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से खड़ा किया, वह अब अपने मूल्यों और सिद्धांतों से दूर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब राष्ट्रहित के बजाय निजी हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें महसूस हो रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं, इसलिए अब उन्होंने अलग राह चुनने का फैसला लिया है।
संस्थापक सदस्य होने का किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि राजनीति में आने से पहले वे चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और दिल्ली से लेकर पंजाब तक संगठन को खड़ा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उनके अनुसार, पार्टी से जुड़े कई समर्पित लोग अब या तो बाहर हो चुके हैं या धीरे-धीरे अलग हो रहे हैं।
‘भ्रष्टाचार खत्म करने वाली पार्टी खुद विवादों में’
राघव चड्ढा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के उद्देश्य से बनी पार्टी आज उन्हीं समस्याओं में उलझ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब समझौतावादी और भ्रष्ट प्रवृत्ति के लोग हावी हो गए हैं, जिससे मूल उद्देश्य कमजोर पड़ा है।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल
इस घटनाक्रम से पहले भी पार्टी के भीतर मतभेद के संकेत सामने आए थे। दो अप्रैल को उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया गया था। इसके बाद पंजाब सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा वापस लिए जाने को भी सियासी तौर पर अहम माना गया। हालांकि बाद में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं
राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के इस फैसले के बाद पंजाब समेत राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसे आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि भाजपा के लिए इसे एक अहम राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।