क्या बीमारी या दवाइयों के बीच रखा जा सकता है एकादशी व्रत? जानिए शास्त्र क्या कहते हैं और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान
वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जो इस वर्ष 27 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं। हालांकि कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि क्या बीमारी की स्थिति में या दवाइयों के साथ व्रत रखा जा सकता है या नहीं।
एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक माना जाता है।
क्या व्रत के दौरान दवा लेना उचित है?
शास्त्रों की व्याख्या के अनुसार यदि व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रसित है या उसे दवाइयों की आवश्यकता है, तो ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। व्रत का उद्देश्य केवल भूखे रहना नहीं बल्कि भक्ति और संयम है। इसलिए आवश्यकता पड़ने पर दवा लेना व्रत भंग नहीं माना जाता।
यदि दवा भोजन के साथ लेनी जरूरी हो, तो ऐसी स्थिति में फलाहार व्रत रखा जा सकता है और शरीर की आवश्यकता के अनुसार हल्का आहार लिया जा सकता है।
शास्त्रों के अनुसार क्या है नियम
धार्मिक मान्यताओं में यह स्पष्ट किया गया है कि बीमारी, वृद्धावस्था, गर्भावस्था या शारीरिक कमजोरी की स्थिति में एकादशी व्रत को कठोरता से निभाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे मामलों में फलाहार या सरल उपवास अपनाने की अनुमति दी गई है।
यदि किसी की तबीयत व्रत के दौरान बिगड़ती है, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए व्रत तोड़ना उचित माना गया है। इस स्थिति में भगवान विष्णु से क्षमा याचना कर व्रत समाप्त किया जा सकता है, जिससे किसी प्रकार का दोष नहीं लगता।
एकादशी व्रत के नियम
एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है और तुलसी के पत्ते तोड़ना या तुलसी को जल अर्पित करना भी निषेध बताया गया है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी पत्र का उपयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
अगले दिन पारण के समय सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की आराधना के बाद सूर्योदय के पश्चात व्रत का समापन किया जाता है।