अब नहीं करना पड़ेगा सिग्नल पर लंबा इंतजार, AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम से अहमदाबाद में बदली ट्रैफिक की तस्वीर, वाहन चालकों को मिली बड़ी राहत
अहमदाबाद में ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक सिस्टम लागू किया गया है, जो सिग्नल पर बेवजह खड़े रहने की समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। इस पहल के तहत 10 प्रमुख चौराहों पर एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है, जो पूरी तरह AI तकनीक पर काम करता है। शुरुआती रिपोर्ट्स में ट्रैफिक फ्लो में सुधार के संकेत मिले हैं।
क्या है एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम?
यह एक स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसमें सिग्नल का समय पहले से तय नहीं होता, बल्कि यह रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा के आधार पर खुद को एडजस्ट करता है। सामान्य ट्रैफिक सिग्नलों में हर दिशा के लिए फिक्स टाइम होता है, लेकिन इस सिस्टम में सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या, उनकी गति और ट्रैफिक घनत्व का लगातार विश्लेषण किया जाता है और उसी के अनुसार सिग्नल टाइमिंग बदली जाती है।
कैसे काम करता है AI ट्रैफिक सिस्टम?
इस सिस्टम में चौराहों पर लगे कैमरे और सेंसर लगातार ट्रैफिक की स्थिति पर नजर रखते हैं।
अगर किसी लेन में ट्रैफिक जल्दी खत्म हो जाता है तो उसका समय घटा दिया जाता है।
जहां ज्यादा भीड़ होती है, वहां ज्यादा समय दिया जाता है।
खाली लेन का अतिरिक्त समय व्यस्त लेन को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इससे गाड़ियों को अनावश्यक रुकना नहीं पड़ता और ट्रैफिक प्रवाह संतुलित बना रहता है।
रोजाना सफर करने वालों को मिली राहत
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इस सिस्टम के लागू होने के बाद कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। ट्रैफिक जाम की स्थिति में कमी आई है और यात्रियों का समय पहले की तुलना में कम लग रहा है। सिग्नल पर इंतजार का समय घटने से ईंधन की भी बचत हो रही है। गर्मियों के मौसम में सिग्नल पर लंबे समय तक रुकने की परेशानी भी काफी हद तक कम हुई है।
18 प्रतिशत तक बेहतर हुआ ट्रैफिक फ्लो
अधिकारियों के अनुसार जिन क्षेत्रों में यह AI आधारित सिस्टम लागू किया गया है, वहां ट्रैफिक फ्लो में लगभग 18 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि स्मार्ट तकनीक शहरी ट्रैफिक की समस्या को प्रभावी तरीके से कम करने में सक्षम है।
आगे अन्य शहरों में विस्तार की संभावना
यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे केवल अहमदाबाद तक सीमित नहीं रखा जाएगा। भविष्य में इसे गुजरात के अन्य शहरों के साथ-साथ देश के बड़े महानगरों में भी लागू किया जा सकता है। प्रशासन इसकी कार्यक्षमता और परिणामों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
मिडिल क्लास और रोजमर्रा के यात्रियों के लिए क्यों खास?
यह सिस्टम खासतौर पर रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इससे समय की बचत होगी, पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और ट्रैफिक में फंसने का तनाव भी काफी हद तक घटेगा।