लखनऊ: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव के निधन ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ा दी है। अब उनकी बीमारी और इलाज से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिन्होंने सभी को हैरान कर दिया है।
चिकित्सीय जानकारी के मुताबिक प्रतीक यादव लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, हाईपरटेंशन और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (डीवीटी) जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। डॉक्टरों की सलाह पर वह नियमित रूप से ब्लड थिनर और बीपी की दवाएं ले रहे थे। उनका इलाज गोमतीनगर स्थित मेदांता अस्पताल में चल रहा था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे थे।
बताया गया कि कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान डॉक्टरों को पल्मोनरी एम्बोलिज्म के संकेत मिले थे। यह बेहद खतरनाक स्थिति होती है, जिसमें शरीर में बना खून का थक्का फेफड़ों की नसों में जाकर फंस जाता है। ऐसी हालत में मरीज को अचानक सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और कुछ ही मिनटों में दिल व फेफड़े काम करना बंद कर सकते हैं।
29 अप्रैल को आखिरी बार पहुंचे थे अस्पताल
जानकारी के मुताबिक प्रतीक यादव 29 अप्रैल को आखिरी बार इलाज के लिए मेदांता अस्पताल पहुंचे थे। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी था, लेकिन बीमारी अंदर ही अंदर गंभीर रूप ले चुकी थी। डॉक्टरों का कहना है कि डीवीटी और हाईपरटेंशन के मरीजों के लिए नियमित जांच और दवाओं में लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि खून का छोटा सा थक्का भी जानलेवा बन सकता है।
छह महीने में पांच बार अस्पताल में भर्ती
सूत्रों के मुताबिक बीते छह महीनों में प्रतीक यादव को करीब पांच बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अप्रैल में सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर उन्हें मेदांता अस्पताल के आईसीयू में रखा गया था। हालांकि तबीयत में थोड़ा सुधार होने के बाद वह डॉक्टरों को बिना बताए अस्पताल से घर लौट गए थे।
डॉक्टरों के अनुसार वह एंग्जाइटी की समस्या से भी जूझ रहे थे, जिससे उनकी स्थिति और जटिल होती जा रही थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई मौत की वजह
प्रतीक यादव की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आ गई है। छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि उनकी मौत मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म की वजह से हुई। यानी फेफड़े की मुख्य नस में बड़ा खून का थक्का जम गया था, जिससे उनकी सांसें थम गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस स्थिति के चलते उनका दिल और सांस दोनों एक साथ काम करना बंद कर गए। चिकित्सा विज्ञान में इसे कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स कहा जाता है।
करीब दो घंटे तक चले पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई। विशेषज्ञों ने हर पहलू की बारीकी से जांच की, लेकिन शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट का कोई निशान नहीं मिला। डॉक्टरों के मुताबिक फेफड़े की मुख्य नस में जमा खून का बड़ा थक्का ही उनकी मौत की मुख्य वजह बना।