100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून! 42% कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, क्या जुलाई में होगी भरपाई? जानिए मौसम विभाग का अनुमान
नई दिल्ली: देश में इस बार जून का महीना बारिश के लिहाज से बेहद निराशाजनक रहा है। आंकड़ों के अनुसार जून 2026 पिछले लगभग 100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून बनने जा रहा है। पूरे देश में सामान्य से 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि मध्य भारत में हालात और भी चिंताजनक हैं, जहां बारिश में 54 प्रतिशत तक की कमी रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति के पीछे प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे अल नीनो प्रभाव को बड़ी वजह मान रहे हैं। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह को लेकर मौसम विभाग ने राहत भरा अनुमान जताया है।
सामान्य से काफी कम रही जून की बारिश
देशभर में जून महीने के दौरान अब तक औसतन 92.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा 157.7 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी पूरे देश में बारिश का स्तर सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महीने के अंतिम दिन अच्छी बारिश होने के बावजूद कुल वर्षा का आंकड़ा 100 मिलीमीटर के आसपास ही पहुंच पाएगा, जो सामान्य से काफी कम रहेगा।
100 साल के रिकॉर्ड में तीसरा सबसे सूखा जून
उपलब्ध मौसमीय आंकड़ों के मुताबिक 1927 से 2026 के बीच जून महीने में इससे कम वर्षा केवल दो बार दर्ज की गई थी। वर्ष 2009 में 87.5 मिलीमीटर और वर्ष 2014 में 92.1 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
ऐसे में जून 2026 को बीते एक सदी के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 4 जून को केरल में मानसून की शुरुआत के बाद भी उसका विस्तार और सक्रियता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी।
मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
देश के चारों प्रमुख मौसमीय क्षेत्रों में बारिश की कमी दर्ज की गई है, लेकिन सबसे खराब स्थिति मध्य भारत की रही है। यहां सामान्य से 54 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 30 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। एक साथ सभी क्षेत्रों में इतनी बड़ी कमी को मौसम विशेषज्ञ असामान्य स्थिति मान रहे हैं।
अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो की सक्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है। यह एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है और भारतीय मानसून भी इससे प्रभावित होता है।
हालिया अंतरराष्ट्रीय आकलनों के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री तापमान तेजी से बढ़ रहा है और अल नीनो मध्यम स्तर की स्थिति के करीब पहुंच चुका है। आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
जुलाई से राहत की उम्मीद
कमजोर जून के बावजूद जुलाई को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के पहले सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और अच्छी बारिश हो सकती है।
विशेष रूप से मध्य भारत, जहां अब तक सबसे अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है, वहां बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होते हैं तो खरीफ फसलों और जलाशयों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
कृषि और जल संसाधनों पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि जून में कमजोर मानसून का असर कृषि गतिविधियों और जल भंडारण पर पड़ सकता है। हालांकि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने पर स्थिति में सुधार संभव है। फिलहाल किसानों, जल संसाधन विभागों और मौसम एजेंसियों की नजर आगामी बारिश पर टिकी हुई है।