बारिश में पौधों पर दिख रहे सफेद कीड़े? इन आसान उपायों से मीलीबग्स का करें सफाया, फिर से हरे-भरे हो जाएंगे पौधे
नई दिल्ली: मानसून का मौसम जहां पौधों की बढ़वार के लिए अनुकूल माना जाता है, वहीं इसी दौरान कई तरह के कीट भी तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इनमें सबसे आम समस्या मीलीबग्स की होती है। सफेद रूई जैसे दिखने वाले ये छोटे कीड़े पौधों की पत्तियों, तनों और नई शाखाओं पर चिपककर उनका रस चूसते हैं, जिससे पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे सूखने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
यदि आपके घर, बालकनी या गार्डन के पौधों पर भी ऐसे सफेद कीड़े दिखाई देने लगे हैं, तो समय रहते कुछ आसान उपाय अपनाकर उनसे छुटकारा पाया जा सकता है।
नीम के तेल का स्प्रे सबसे असरदार उपाय
मीलीबग्स को नियंत्रित करने के लिए नीम का तेल बेहद प्रभावी और प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसके लिए एक लीटर गुनगुने पानी में एक से दो चम्मच नीम का तेल मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें। मिश्रण को अच्छी तरह हिलाने के बाद पौधों की पत्तियों और तनों पर छिड़काव करें। सप्ताह में दो बार इसका प्रयोग करने से कीड़ों की संख्या तेजी से कम हो सकती है।
रबिंग अल्कोहल से तुरंत खत्म होंगे कीड़े
अगर पौधे पर संक्रमण शुरुआती अवस्था में है, तो रबिंग अल्कोहल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। रुई या कॉटन स्वैब को अल्कोहल में भिगोकर सीधे प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। अल्कोहल के संपर्क में आते ही मीलीबग्स नष्ट हो जाते हैं। यह तरीका छोटे संक्रमण वाले पौधों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
तेज पानी की धार से हटाएं कीड़े
गुड़हल जैसे मजबूत पौधों पर लगे मीलीबग्स को तेज पानी के प्रेशर से भी हटाया जा सकता है। पाइप या स्प्रेयर की मदद से पौधे को अच्छी तरह धोने पर कीड़े अपनी पकड़ छोड़ देते हैं। हालांकि नाजुक पौधों या बेलों पर इस तरीके का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।
डिश वॉश लिक्विड का घोल भी है कारगर
घर में उपलब्ध डिश वॉश लिक्विड भी मीलीबग्स से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है। एक लीटर पानी में एक चम्मच लिक्विड साबुन मिलाकर पौधों पर स्प्रे करें। लगभग 20 मिनट बाद पौधे को साफ पानी से धो दें, ताकि साबुन के अवशेष पत्तियों पर जमा न रहें।
दोबारा संक्रमण रोकने के लिए रखें इन बातों का ध्यान
जैसे ही किसी पौधे में मीलीबग्स दिखाई दें, उसे अन्य पौधों से अलग कर दें ताकि संक्रमण फैल न सके। गमलों के आसपास चींटियों की मौजूदगी पर भी नजर रखें, क्योंकि चींटियां अक्सर इन कीड़ों को एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंचाती हैं। यदि किसी शाखा या टहनी पर संक्रमण बहुत ज्यादा हो गया हो, तो उसे काटकर अलग कर देना बेहतर विकल्प हो सकता है।